मतांतरण गैंग का आतंकी लिंक उजागर, रांची जेल से आगरा लाया गया अयान जावेद, नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद

आगरा के सदर क्षेत्र की दो बहनों के मतांतरण मामले में नया मोड़ सामने आया है। आतंकी संगठनों से जुड़े संदिग्ध अयान जावेद को रांची सेंट्रल जेल से बी-वारंट पर आगरा लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उससे गिरोह के देश-विदेश में फैले नेटवर्क और फंडिंग को लेकर अहम जानकारी मिल सकती है।

Mar 7, 2026 - 02:29
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मतांतरण गैंग का आतंकी लिंक उजागर, रांची जेल से आगरा लाया गया अयान जावेद, नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
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आगरा। थाना सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों के मतांतरण मामले की जांच में अब बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जांच के दौरान आतंकी संगठनों से जुड़े संदिग्ध अयान जावेद का नाम सामने आने के बाद उसे झारखंड की रांची सेंट्रल जेल से बी-वारंट पर आगरा लाया गया है। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे पूछताछ के लिए एक दिन की कस्टडी रिमांड पर सौंप दिया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ में मतांतरण गिरोह के बड़े नेटवर्क और उसके संपर्कों को लेकर अहम खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें दिल्ली निवासी अब्दुल रहमान, गोवा की रहने वाली आयशा और शाहगंज निवासी रहमान कुरैशी शामिल हैं। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों में अयान जावेद की भूमिका सामने आई, जिसके बाद पुलिस अदालत से बी-वारंट हासिल कर उसे पूछताछ के लिए आगरा लाई है।

जांच में सामने आया है कि अयान जावेद को झारखंड एटीएस ने अप्रैल 2025 में धनबाद से गिरफ्तार किया था। उसके साथ उसकी पत्नी शबनम, गुलफाम हसन और शहजाद आलम को भी पकड़ा गया था। चारों फिलहाल रांची सेंट्रल जेल में बंद हैं। एटीएस की जांच में अयान जावेद का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठनों हिज्ब-उल-तहरीर और अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से बताया गया था। आरोप है कि वह इंटरनेट मीडिया के जरिए देश विरोधी गतिविधियों में सक्रिय था और लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का काम कर रहा था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि देहरादून की एक युवती उसके संपर्क में थी और दोनों के बीच 200 से अधिक बार बातचीत हुई थी। इसी कड़ी को जोड़ते हुए आगरा पुलिस अब उससे गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मतांतरण गिरोह और उसके आतंकी संपर्कों के बीच कोई सीधा संबंध तो नहीं था।

डीसीपी सिटी आदित्य ने बताया कि आरोपी से पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, उसके संपर्कों और फंडिंग के स्रोतों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है और इसके तार विदेशों तक जुड़े होने की भी संभावना है।

कोलकाता से बरामद हुई थीं दोनों बहनें

गौरतलब है कि सदर क्षेत्र की रहने वाली दो सगी बहनों को पुलिस ने जून 2025 में कोलकाता के तपसिया इलाके से बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल समेत छह राज्यों में छापेमारी की थी।

जांच में सामने आया कि मतांतरण गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और बड़ी संख्या में लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनका मतांतरण कराया जाता था। पुलिस को इस नेटवर्क को विदेशों से फंडिंग मिलने के भी संकेत मिले हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।