मरने के अलावा कोई चारा नहीं’, यही शब्द बोले हैं सुसाइड करने वाली फैशन डिजाइनर ने ताजगंज पुलिस के लिए, क्या यह मृत्यु पूर्व बयान की श्रेणी में नहीं आता? कानूनन आता है तो फिर ताजगंज थाने के जिम्मेदारों पर एक्शन के मामले में चुप्पी क्यों?  

आगरा में एक फैशन डिजाइनर युवती की आत्महत्या का मामला आने वाले दिनों अदालत की चौखट तक पहुंचेगा। वहां आरोपी कांस्टेबल जेबी गौतम पर लगे चार्ज पर विचार होगा, लेकिन इस सारी प्रक्रिया से पहले समाज और प्रशासन के सामने एक सवाल गूंज रहा है कि क्या एक युवती की आखिरी पुकार सिर्फ एक आरोपी तक सीमित रहेगी, या उन सवालों तक भी पहुंचेगी जो उसने पुलिस व्यवस्था और ताजगंज थाने पर उठाए थे?

Mar 14, 2026 - 19:05
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मरने के अलावा कोई चारा नहीं’, यही शब्द बोले हैं सुसाइड करने वाली फैशन डिजाइनर ने ताजगंज पुलिस के लिए, क्या यह मृत्यु पूर्व बयान की श्रेणी में नहीं आता? कानूनन आता है तो फिर ताजगंज थाने के जिम्मेदारों पर एक्शन के मामले में चुप्पी क्यों?   

आगरा। ताजगंज थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक युवती की मौत ने गंभीर और असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। मरने से पहले बनाए गए वीडियो में युवती ने साफ आरोप लगाया कि जब वह चार साल तक साथ रखने वाले सिपाही जेबी गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने ताजगंज थाने पहुंची, तो वहां उसे न्याय दिलाने के बजाय यह कहकर लौटा दिया गया कि “इस केस में कुछ नहीं होगा।” अब युवती की आत्महत्या के बाद वीडियो सामने आने पर पुलिस ने सिपाही को तो निलंबित कर जेल भेज दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस थाने में बैठकर युवती को कथित रूप से हतोत्साहित किया गया, क्या वहां के जिम्मेदार अधिकारी और पुलिसकर्मी इस मामले में दोष से बच सकते हैं? यही सवाल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए भी है कि उन्होंने मृतका के वीडियो को मृत्यु पूर्व का बयान मानकर अब तक थाने के जिम्मेदारों पर एक्शन क्यों नहीं लिया है?

बता दें कि ताजगंज क्षेत्र में एक युवती ने आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो में आरोप लगाया था कि चार साल तक उसे पत्नी की तरह साथ रखने वाले ताजगंज थाने में तैनात सिपाही जेबी गौतम ने शादी से इंकार कर दिया। इसके आधार पर जब वह मुकदमा दर्ज कराने ताजगंज थाने पहुंची तो उसे कथित रूप से डराकर भगा दिया गया। युवती ने अपना जो वीडियो रिकार्ड किया था, उसका एक ही हिस्सा सामने आने दिया गया, जिसमें वह अपनी मौत के लिए सिपाही जेबी गौतम और उसके परिवार को जिम्मेदार बता रही है, लेकिन अब इसी वीडियो का दूसरा हिस्सा भी वायरल हो चुका है, जिसमें उसने अपने साथ थाने में हुए व्यवहार का दर्द बयां किया है। मृतका के दूसरे वीडियो में कही गई बातें इस प्रकार हैं-

एक बात तो पता चल गई कि कहीं कुछ नहीं होता। लड़के, लड़कियों के साथ कुछ भी कर लें, लड़कों का कुछ नहीं होता। आज ताजगंज थाने में मुझे सबके बीच बैठकर यही पता चला। वहां गई थी मुकदमा दर्ज कराने। जेबी गौतम ने मेरा शारीरिक, मानसिक, सब तरह का शोषण किया। चार साल बीवी बनाकर रखा। मुझे उन लोगों ने (ताजगंज थाने की पुलिस) कहा- इस केस में कुछ नहीं होगा, वो निकल जाएगा। क्या यही कानून है, क्या लड़कियों के लिए कोई कानून नहीं बना। जो महिला की रक्षा के लिए बैठे हैं, वही ये समझाकर भेज दें कि कुछ नहीं होगा तो हम कहां जाएं। हमारे पास कोई और चारा नहीं है, मरने के अलावा फिर। मुझे हर जगह, सभी ने…किसी ने कहा छोड़ दो उसे, किसी ने कहा मुकदमा मत करो, तुम्हीं भटकोगी, तुम परेशान होगी। और तो और, जेबी गौतम ने तो मुझसे ये तक कहा कि मैं न जाने किस-किस के साथ रिश्ते में रही जबकि चार साल तक मैं उसके साथ रही। मुझ पर इतने इल्जाम लगा दिये हैं।

चार साल लिव-इन, फिर शादी से इंकार

मृतका की इन बातों से इतना तो साफ है कि युवती पिछले चार वर्षों से ताजगंज थाने में तैनात सिपाही जेबी गौतम के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। युवती का आरोप था कि सिपाही ने उसे पत्नी की तरह साथ रखा, लेकिन जब उसने शादी की बात की तो सिपाही ने साफ इंकार कर दिया।

इसके बाद युवती ने न्याय पाने के लिए ताजगंज थाने का रुख किया। लेकिन उसके अनुसार वहां उसे रिपोर्ट लिखने के बजाय हतोत्साहित कर वापस भेज दिया गया।

वीडियो के आधार पर सिपाही जेल भेजा गया

युवती की मौत के बाद उसके पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने वीडियो के एक हिस्से को आधार बनाते हुए सिपाही जेबी गौतम को पहले निलंबित किया और फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अब मामला अदालत में जाएगा और संभावना है कि युवती के वीडियो को मृत्यु पूर्व बयान के रूप में पेश किया जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल: थाने पर लगे आरोपों का क्या होगा?

लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। युवती के वीडियो में जहां एक ओर सिपाही पर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर उसने ताजगंज थाने के पुलिसकर्मियों के रवैये पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि जब वह रिपोर्ट दर्ज कराने गई तो उसे यह कहकर टाल दिया गया कि इस केस में कुछ नहीं होगा।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या पुलिस के मामले में युवती के बीडियो का यह हिस्सा मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जाएगा? क्या थाने में उसके साथ हुए व्यवहार की जांच होगी? क्या थाने के प्रभारी समेत अन्य जिम्मेदारों पर कोई एक्शन होगा?

क्या पुलिस की भूमिका की होगी जांच?

युवती ने अपने अंतिम वीडियो में साफ कहा कि पुलिस के रवैये के कारण उसके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। अगर यह आरोप सच हैं तो सवाल सिर्फ एक सिपाही तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे तंत्र पर खड़ा हो जाता है। महिला सुरक्षा के दावे करने वाली व्यवस्था में यदि एक युवती थाने से ही निराश होकर लौटे और फिर जान दे दे, तो यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता भी मानी जाएगी।

क्या कहते हैं कानून के जानकार

आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्गविजय सिंह भैया एडवोकेट का कहना है कि मृतका ने मरने से पहले बनाये वीडियो में जो-जो कहा है, वह उसका मृत्यु पूर्व बयान ही माना जाएगा। वीडियो में उसने जिस-जिस का नाम लिया है, वे सभी जांच के दायरे में आएंगे। उन्होंने कहा कि चूंकि मृतका ने ताजगंज थाना पुलिस पर भी आरोप लगाए हैं, ऐसे में उसी थाने के किसी अधिकारी द्वारा जांच कराई जाती है तो इससे निष्पक्ष जांच होने में संदेह बना रहेगा। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की जांच ताजगंज थाने से हटाकर किसी दूसरी एजेंसी को दें ताकि उन पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ सकें, जिन्होंने थाने के अंदर इस युवती को हतोत्साहित कर मरने के लिए मजबूर कर दिया।

SP_Singh AURGURU Editor