ट्रांसपोर्टर हिट एंड रन केस, साजिश या हादसा? ड्राइवर फरार, पुलिस अब एनबीडब्ल्यू की तैयारी में

आगरा में ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत का मामला उलझता जा रहा है। पुलिस को कार तो मिल गई है, लेकिन ड्राइवर फरार है। परिवार ने इसे साजिशन हत्या बताया है और जीएसटी अधिकारियों समेत 6 लोगों पर शक जताया है। पुराने विवाद और कथित अवैध वसूली के आरोप इस केस को और संवेदनशील बना रहे हैं। अब पुलिस ड्राइवर के खिलाफ NBW जारी करने की तैयारी में है।

May 6, 2026 - 20:49
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ट्रांसपोर्टर हिट एंड रन केस, साजिश या हादसा? ड्राइवर फरार, पुलिस अब एनबीडब्ल्यू की तैयारी में
ट्रांसपोर्टर असगर अली

आगरा। आगरा में ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस अभी तक मुख्य आरोपी ड्राइवर तक नहीं पहुंच सकी है। अब इस हाई-प्रोफाइल हिट एंड रन केस में पुलिस सख्त रुख अपनाते हुए फरार चालक के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी कराने की तैयारी कर रही है।

यह मामला पहले ही उस वक्त सुर्खियों में आ गया था, जब घटना का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। लेकिन तमाम चर्चाओं के बावजूद जांच में ठोस प्रगति न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि 4 अप्रैल की देर रात, करीब 3 बजे, असगर अली अपने गोदाम के पास मौजूद थे। तभी तेज रफ्तार कार ने बिना हॉर्न और बिना ब्रेक लगाए उन्हें सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद वह काफी देर तक सड़क पर पड़े रहे, जब तक कि एक परिचित ने परिवार को सूचना नहीं दी।

एक्सीडेंट नहीं, प्लान्ड मर्डर

मृतक के बेटे सजमन अली ने इस मामले को महज हादसा मानने से इनकार करते हुए साजिशन हत्या का केस दर्ज कराया था। एफआईआर में जीएसटी विभाग की एक असिस्टेंट कमिश्नर, उनके सहयोगियों, एक डॉक्टर, ड्राइवर और अन्य लोगों समेत कुल 6 लोगों पर हत्या करवाने का शक जताया गया है। इसी आरोप ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

गाड़ी बरामद, लेकिन ड्राइवर गायब

पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार को बरामद कर लिया था, जो जालौन नंबर की बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि गाड़ी प्रेम नारायण नाम का व्यक्ति चला रहा था, लेकिन वह अब तक फरार है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के वक्त गाड़ी में और कौन-कौन सवार था। कुछ संदिग्ध लोगों की लोकेशन घटना स्थल के आसपास मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे शक और गहरा गया है।

पुलिस का अगला कदम

डीसीपी सिटी के अनुसार, इस केस की असली कड़ी ड्राइवर ही है। ड्राइवर की गिरफ्तारी के लिए एनबीडब्ल्यू जारी कराया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह हादसा था या सुनियोजित हत्या। 

पुराना विवाद बना शक की बड़ी वजह

इस केस की जड़ें एक पुराने विवाद से भी जुड़ी बताई जा रही हैं। 2 नवंबर को असगर अली की ट्रांसपोर्ट गाड़ी जीएसटी विभाग ने पकड़ी थी। आरोप है कि उनसे अवैध वसूली की कोशिश की गई। गाड़ी छोड़ने के एवज में 4.5 लाख रुपये लेने का आरोप है, लेकिन रसीद केवल 3.6 लाख की मिली थी। असगर अली ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी। इसके बाद उनकी गाड़ियों को बार-बार रोका जाने लगा। शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। कुछ कथित पत्रकारों द्वारा भी उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। इन घटनाओं ने परिवार के शक को और मजबूत कर दिया है कि यह एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।

अब सबकी नजर ड्राइवर पर

पूरा मामला अब एक ही बिंदु पर आकर टिक गया है, वह है फरार ड्राइवर। उसकी गिरफ्तारी ही इस केस की गुत्थी सुलझा सकती है।