ट्रांसपोर्टर की मौत सड़क हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित कत्ल था, पुलिस ने केस में हत्या की धारा बढ़ाई, जीएसटी विवाद से जुड़ती जा रही साजिश की परतें
आगरा। अजमन ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक असगर अली की मौत को जो पुलिस पांच हफ्ते तक हादसा मानती रही, उसी पुलिस ने अब मान लिया है कि ट्रांसपोर्टर का सुनियोजित तरीके से एक्सीडेंट किया गया। इसके बाद पुलिस ने केस में हत्या की धारा बढ़ा दी है। पुलिस जांच में सामने आये तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन ने पूरे मामले को सुनियोजित साजिश की दिशा में मोड़ दिया है।
मेवाती गली, भोगीपुरा निवासी असगर अली की विगत चार अप्रैल की सुबह उस समय मौत हो गई थी जब वह पैदल सड़क पर जा रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से उन्हें जोरदार टक्कर मारी थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि असगर अली हवा में उछलकर दूर जा गिरे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॊक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया था।
घटना के तुरंत बाद परिजनों ने इसे साधारण हादसा मानने से इनकार कर दिया था। परिवार ने महिला जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह, उनके पति अजय सिंह, दिनेश सोलंकी, रवि यादव और कामरान वारसी सहित कई लोगों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। हालांकि शुरुआती दौर में पुलिस इस मामले को सड़क दुर्घटना बताती रही और बाद में केवल वाहन चालक की लापरवाही से मौत की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन ने पलटी पूरी कहानी
जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पड़ताल तेज की। इसी दौरान रवि यादव की लोकेशन घटनास्थल के आसपास मिली। पुलिस के अनुसार जिस कार से टक्कर मारी गई, वह जालौन निवासी प्रेम नारायण के नाम पर पंजीकृत निकली। छानबीन में पता चला कि प्रेम नारायण आगरा में ही काम करता है और कार भी आगरा में ही थी।
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब घटना के बाद रवि यादव, प्रेम नारायण और अन्य संबंधित लोग अचानक गायब हो गये। पुलिस सूत्रों के अनुसार रवि यादव की लोकेशन बाद में प्रयागराज में मिली। इसके बाद ही पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को हत्या की साजिश के एंगल से देखना शुरू किया।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने इस बात की पुष्टि की कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे को हत्या की धारा में बदल दिया गया है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जायेगी।
जीएसटी ऑफिस विवाद से जुड़ रहे तार
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना के तार जीएसटी विभाग में कथित वसूली और विवाद से जुड़े हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि मृतक असगर अली ने महिला जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाते हुए कई शिकायतें की थीं।
दूसरी ओर निवेदिता सिंह ने भी असगर अली पर चौथ मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और मामला लगातार बढ़ता जा रहा था।
पिता को धमकाने आते थे- बेटे का आरोप
मृतक के बेटे डॊ. अजमन अली ने पुलिस को दिये बयान में आरोप लगाया है कि रवि यादव और कामरान वारसी उसके पिता को लगातार धमकाने आते थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि रवि यादव के महिला जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह के पति अजय सिंह से घनिष्ठ संबंध थे। इन बयानों के सामने आने के बाद अब पुलिस की जांच कई लोगों की भूमिका की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
अब सबकी नजर पुलिस कार्रवाई पर
करीब पांच सप्ताह तक सड़क हादसा बताये गये इस मामले में हत्या की धारा जुड़ने के बाद अब पुलिस पर निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। परिवार का आरोप है कि यदि शुरू से ही मामले की गंभीरता से जांच होती तो कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पहले ही सामने आ सकते थे।
अब देखना यह होगा कि पुलिस केवल रवि यादव तक सीमित रहती है या फिर उन सभी नामों की भूमिका की भी जांच करती है, जिन पर शुरुआत से ही परिजनों ने साजिश का आरोप लगाया था।