बरेली में जल जीवन मिशन की टंकी सात महीने में ढहने के मामले में दो इंजीनियर बर्खास्त, जेई निलंबित
-आरके सिंह- बरेली। सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता की पोल खोलते हुए बरेली के सरदार नगर गांव में बना ओवरहेड टैंक महज सात महीने में जमींदोज होने के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे अचानक ढही इस टंकी ने न केवल सिस्टम की लापरवाही उजागर की, बल्कि पांच लोगों को घायल भी कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने चंद घंटों में सख्त कार्रवाई करते हुए दो इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त कर दीं, जबकि एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मंगलवार को बताया कि उपजिलाधिकारी आंवला विदुषी सिंह की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की गई। यह टंकी विकास खंड आलमपुर जाफराबाद की तहसील आंवला के ग्राम सरदार नगर में गाटा संख्या 315 मि, रकबा 0.064 हेक्टेयर बंजर भूमि पर जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई थी। निर्माण कार्य एनसीसी लिमिटेड कार्यदायी संस्था द्वारा कराया गया था, जिसे सात महीने पहले ही हैंडओवर कर जलापूर्ति शुरू कर दी गई थी।
घायल हुए पांच लोग, अस्पताल में भर्ती
टंकी गिरने से वीरपाल (45 वर्ष), रविंद्र (48 वर्ष), डोरीलाल (35 वर्ष), अर्जुन कश्यप (40 वर्ष) और वेदपाल (50 वर्ष) घायल हुए थे। इनमें वेदपाल को मामूली चोट आई, जबकि बाकी चार को इलाज के लिए सिद्धि विनायक अस्पताल, बरेली में भर्ती कराया गया है। जिलाधिकारी स्वयं देर शाम अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना।
एफआईआर, ब्लैकलिस्ट और जांच
डीएम अविनाश सिंह की रिपोर्ट पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निर्देश पर निर्माणदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस जारी किया गया है।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि जल निगम ग्रामीण के जेई को निलंबित किया गया है। असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच और अधिशासी अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इसके अलावा थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी टीपीआई बीएलजी के बरेली स्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाते हुए कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है और उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
24 घंटे में रिपोर्ट, फिर और कार्रवाई तय
पूरे मामले की प्रारंभिक जांच टेक्निकल ऑडिट कमेटी (टीएसी) को सौंपी गई है, जिसे 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा एडीएम स्तर के अधिकारी और तकनीकी टीम से विस्तृत जांच कराई जाएगी। शासन को पूरे प्रकरण की जानकारी दे दी गई है और कार्यदायी संस्था द्वारा कराए गए अन्य सभी कार्यों की भी जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
सवाल बड़ा—क्या ‘जल जीवन मिशन’ में भी समझौता?
सात महीने में ही ढही इस टंकी ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस योजना का उद्देश्य हर घर तक पानी पहुंचाना है, वहीं उसमें इस तरह की लापरवाही आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।