दो साल तक असहनीय पेट दर्द से तड़पते ठेला संचालक को एसएन में मिली नई जिंदगी

मथुरा के छाता-कोसी निवासी 38 वर्षीय ठेला संचालक राजेंद्र शर्मा पिछले दो वर्षों से असहनीय पेट दर्द से जूझ रहे थे। कई शहरों में लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद बीमारी का पता नहीं चल पाया। आगरा में CT एंजियोग्राफी से खुलासा हुआ कि छोटी आंत को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी SMA में 99% ब्लॉकेज था, जिससे गैंग्रीन का खतरा बन गया था। SN मेडिकल कॉलेज आगरा के CTVS विभाग में डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने जटिल Ilio-SMA Bypass सर्जरी कर छोटी आंतों में रक्त प्रवाह बहाल किया। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज अब बिना दर्द के सामान्य भोजन कर पा रहा है और स्वस्थ होकर डिस्चार्ज कर दिया गया।

Mar 18, 2026 - 17:54
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दो साल तक असहनीय पेट दर्द से तड़पते ठेला संचालक को एसएन में मिली नई जिंदगी
गंभीर बीमारी से सही हुए मरीज के साथ चिकित्सकों का दल। ।

99% ब्लॉकेज से छोटी आंत पर मंडरा रहा था गैंग्रीन का खतरा, जटिल Ilio-SMA Bypass सर्जरी ने बचाई जान

आगरा। मथुरा जनपद के छाता-कोसी क्षेत्र के निवासी 38 वर्षीय राजेंद्र शर्मा, जो सड़क किनारे ठेला लगाकर भोजन बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, पिछले दो वर्षों से असहनीय पेट दर्द की पीड़ा झेल रहे थे। उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि जैसे ही वह कुछ भी खाते, पेट में तेज और असहनीय दर्द शुरू हो जाता। धीरे-धीरे उन्होंने खाना लगभग छोड़ दिया, जिसके चलते उनका वजन करीब 30 किलो तक कम हो गया। एसएन मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसे नई जिंदगी दी है। 

राजेंद्र शर्मा ने राहत की उम्मीद में मथुरा, आगरा और दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज कराया और इस दौरान लगभग 3 से 4 लाख रुपये खर्च कर दिए, लेकिन कहीं भी बीमारी की सही वजह सामने नहीं आ सकी। लगातार बिगड़ती हालत और आर्थिक बोझ के बीच आखिरकार आगरा में हुई एक विशेष जांच ने उनकी जानलेवा बीमारी का खुलासा किया।

सीटी एंजियोग्राफी में सामने आई जानलेवा सच्चाई

पेट की सीटी एंजियोग्राफी जांच में पता चला कि छोटी आंत को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी SMA (Superior Mesenteric Artery) में 99 प्रतिशत तक खतरनाक ब्लॉकेज था। यह स्थिति बेहद गंभीर और जानलेवा मानी जाती है, क्योंकि इस कारण छोटी आंतों में रक्त प्रवाह रुक सकता है और कभी भी आंतों में गैंग्रीन विकसित हो सकता था। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक ऐसी स्थिति थी जिसमें समय रहते उपचार न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती थी।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह पर मेडिकल कॉलेज भेजा गया मरीज

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह के बाद मरीज को एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के सीटीवीएस (Cardio Thoracic & Vascular Surgery) विभाग में रेफर किया गया। वहां कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल ने मरीज की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मरीज लीवर संक्रमण से भी पीड़ित था। इस अतिरिक्त जटिलता ने सर्जरी को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया। बावजूद इसके, मेडिकल टीम ने जोखिम उठाते हुए मरीज को ऑपरेशन के लिए तैयार किया।

डॉ. सुशील सिंघल और टीम ने किया हाई-रिस्क ऑपरेशन

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉ. सुशील सिंघल (MCh CTVS) और उनकी टीम ने अत्यंत जटिल और उच्च कौशल वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान पेट खोलकर पैर की इलियक आर्टरी (Iliac Artery) से एक कृत्रिम नस (ePTFE 6mm graft) के माध्यम से SMA तक Ilio-SMA Bypass बनाया गया। इस प्रक्रिया के जरिए छोटी आंतों में तुरंत रक्त प्रवाह बहाल हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि मरीज पहले से कमजोर था और लीवर संक्रमण की वजह से जोखिम कई गुना बढ़ गया था।

सर्जरी के बाद पहली बार बिना दर्द के खा पा रहा है मरीज

सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सुधरी। अब राजेंद्र शर्मा को खाना खाने पर पहले जैसी असहनीय पीड़ा नहीं होती। लंबे समय बाद सामान्य भोजन कर पाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ नजर आई। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से मुस्कुराते हुए डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।

यह रही सर्जरी और एनेस्थीसिया टीम

सर्जरी टीम में डॉ. सुशील सिंघल (MCh CTVS),  डॉ. शिव, डॉ. शुभांशु अग्रवाल शामिल थे, जबकि  एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अपूर्व मित्तल, डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. प्रभा, डॉ. साइमा, डॉ. जसलीन शामिल थे। 

एसएन में अब बड़े शहरों जैसी सुपरस्पेशियलिटी सुविधाएं

एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि कॉलेज की सुपरस्पेशियलिटी विंग में अब अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से जटिल से जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को गंभीर और महंगे इलाज के लिए दिल्ली, जयपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं है। बेहतर और उन्नत इलाज अब आगरा में ही उपलब्ध है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए बड़ी राहत है।