एसआई भर्ती परीक्षा के सवाल पर बवाल, ‘पंडित’ विकल्प पर भड़के मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय

उत्तर प्रदेश पुलिस उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक विवादित प्रश्न में “अवसर के अनुसार बदलने वाला” के लिए विकल्पों में “पंडित” शब्द शामिल किए जाने पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे सामान्य गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया आपत्तिजनक कृत्य बताते हुए कहा कि यह हिंदू समाज की समरसता बिगाड़ने की कोशिश है। मंत्री ने कहा कि किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या परंपरा के प्रति अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने दोषी पेपर सेटर की पहचान कर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी समाज की भावनाओं से खिलवाड़ न कर सके।

Mar 15, 2026 - 21:59
 0
एसआई भर्ती परीक्षा के सवाल पर बवाल, ‘पंडित’ विकल्प पर भड़के मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय
कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय।

उच्च शिक्षा मंत्री बोले- यह सिर्फ गलती नहीं, हिंदू समाज की समरसता बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश, दोषी को जल्द चिन्हित कर मिले कड़ी सजा

आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक विवादित प्रश्न को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न में “अवसर के अनुसार बदलने वाला” के लिए दिए गए विकल्पों में “पंडित” शब्द शामिल किए जाने पर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कड़ा विरोध जताया है।

मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने इस कथित प्रश्न को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “पंडित” शब्द को इस तरह के प्रश्न में विकल्प के रूप में शामिल करने का न तो कोई औचित्य है और न ही कोई भाषाई या वैचारिक तालमेल। उन्होंने इसे सामान्य त्रुटि मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक गंभीर और आपत्तिजनक कृत्य है।

कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने बयान में कहा कि इस प्रकार का प्रश्न तैयार करना किसी साधारण चूक का परिणाम नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम किसी मानसिक विकृति से पीड़ित पेपर सेटर द्वारा जानबूझकर किया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसा व्यक्ति हिंदू समाज की समरसता, सामाजिक संतुलन और पारंपरिक सम्मान को चोट पहुंचाने की मंशा रखता है। मंत्री ने कहा कि किसी भी जाति, धर्म, वर्ग, परंपरा या सामाजिक पहचान के प्रति अपमानजनक टिप्पणी, संकेत, शीर्षक या विकल्प देना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

किसी भी समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं

उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और समाज दोनों को ऐसे मामलों में बेहद संवेदनशील रहना होगा। उन्होंने कहा कि  किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या परंपरा के प्रति कोई भी ऐसी टिप्पणी, वक्तव्य अथवा टाइटल देना, जो अपमानजनक हो, कतई स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले को केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित न मानते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक गरिमा से जुड़ा विषय बताया।

हालिया फिल्म विवाद का भी किया जिक्र

योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुछ दिन पहले एक फिल्म का नाम भी इसी प्रकार अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया था, जिससे समाज के एक वर्ग की भावनाएं आहत हुई थीं। उन्होंने कहा कि अब परीक्षा जैसे संवेदनशील मंच पर इस तरह की सामग्री सामने आना और भी गंभीर है।

उनका कहना है कि बार-बार इस तरह की घटनाएं सामने आना इस बात का संकेत है कि कुछ लोग सामाजिक वैमनस्य फैलाने और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों का मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

दोषी पर  तत्काल कार्रवाई की मांग

मंत्री ने संबंधित एजेंसियों और परीक्षा प्रबंधन से मांग की है कि इस प्रश्न को तैयार करने वाले पेपर सेटर की तत्काल पहचान की जाए और उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में भी वे किसी न किसी समाज, वर्ग या परंपरा के खिलाफ इसी तरह की अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री तैयार करते रहेंगे।

योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि दोषी को दंडित करने का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक सख्त संदेश देना भी है, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी समाज की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने से पहले सौ बार सोचे।

भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल

इस विवाद के बाद अब भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि भर्ती परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में न सिर्फ शैक्षणिक गुणवत्ता, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं होती, तो यह न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता पर असर डालता है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है।