पितृ-श्राद्ध भजनोत्सव में गूंजे श्रद्धा के स्वर, कवियों ने पितरों को अर्पित किए श्रद्धा-सुमन
आगरा। पितरों की स्मृति, उनके प्रति कृतज्ञता और पारिवारिक संस्कारों को समर्पित ‘पितृ-श्राद्ध भजनोत्सव’ में शहर के साहित्यकारों और कवियों ने काव्य पाठ एवं भजनों के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था-आगरा के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत बुधवार को ट्रांस यमुना कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक भावनाओं का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का आयोजन संस्था के ‘हृदयंगम्-105’ के अंतर्गत कंठोष्ठ्य-उत्सव के रूप में किया गया। दीप प्रज्ज्वलन करते हुए उपाचार्य डॉ. राजेन्द्र दवे ने कहा कि वर्तमान परिवेश में पितरों की आत्मशांति और उनकी पुण्यस्मृति में किया गया कोई भी अनुष्ठान चार धाम की यात्रा के समान है।
मुख्य अतिथि कंठ कोकिला निशिराज कवयित्री एवं भजन गायिका ने भावपूर्ण स्वर में भजन प्रस्तुत करते हुए कहा—
“अखंड तू निनाद कर
प्रचंड शंखनाद कर
वह गर्जना हो सिंह सी
स्वयं को आह्लाद कर।”
इसी संदर्भ में डॉ. निशिराज ने कहा कि तर्पण केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि स्मृति, दायित्व और संस्कारों का जीवंत धार्मिक अनुष्ठान है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि सम्राट डॉ. राजेन्द्र मिलन ने पितरों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा—
“बुजुर्ग ये हमारे
हैं धरोहर हमारी
इनके ही आदर्श
हैं दौलत हमारी।”
कार्यक्रम का संचालन कवि डॉ. यशोयश ने किया। संयोजक डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सह संयोजक नरेंद्र शर्मा ‘एडवोकेट’ ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर कवि-कवयित्रियों और पत्रकारों ने भी काव्य पाठ के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इनमें डॉ. यशोयश, डॉ. सौरभ देवा, विजया तिवारी, इंदल सिंह इंदु, रामेश्वर दयाल, ओमकार नाथ सविता, प्रताप पांडे, प्रणवीर, दीपक गुप्ता, डॉ. रामेन्द्र शर्मा रवि, निशिथ राज, रेनुका भारद्वाज, राजकुमार जैन, परी शर्मा और तान्या शर्मा आदि शामिल रहे। सभी ने अपने-अपने अंदाज में काव्य पाठ करते हुए पितरों के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।