यमुना बनी जहर की धारा: राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, ब्रज में आस्था पर गहराता संकट
आगरा/वृंदावन। ब्रज क्षेत्र में यमुना नदी की बिगड़ती स्थिति अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं के अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। बढ़ते प्रदूषण, रुकती धारा और जहरीले जल ने जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है, वहीं मंदिरों की सदियों पुरानी परंपराएं भी संकट में पड़ गई हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर ब्रज वृन्दावन देवालय समिति और रिवर कनेक्ट कैंपेन ने अब सीधे राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग उठाई है।
वृंदावन स्थित रंगजी मंदिर के बड़े बगीचे में आयोजित बैठक में यमुना प्रदूषण और उसकी अविरल धारा में आ रही बाधाओं पर गहन मंथन हुआ। बैठक की अध्यक्षता आलोक गोस्वामी ने की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल महामहिम राष्ट्रपति, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री तथा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर यमुना की निर्मल एवं अविरल धारा बहाल कराने की मांग करेगा।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित वृंदावन दौरे को एक अहम अवसर मानते हुए समिति ने पत्र और मीडिया के माध्यम से अपील की है कि भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ब्रजभूमि, विशेषकर वृंदावन और मथुरा, विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां की धार्मिक परंपराएं यमुना के पवित्र जल से गहराई से जुड़ी रही हैं। मंदिरों में विग्रहों का अभिषेक, रसोई और अन्य धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत रूप से यमुना जल से ही संपन्न होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में प्रदूषण और जल प्रवाह में रुकावट के कारण इन परंपराओं के निर्वहन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
वक्ताओं ने चिंता जताई कि श्रद्धालु आज भी आस्था के चलते यमुना के दूषित जल से आचमन करने को विवश हैं, जो न केवल धार्मिक पीड़ा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
बैठक को आलोक गोस्वामी, कांतानाथ चतुर्वेदी, गोस्वामी कृष्णानंद भट्ट, श्रीमती अनघा श्रीनिवासन, दीपक गोस्वामी, विजय किशोर गोस्वामी, जगन्नाथ पोद्दार, लक्ष्मीनारायण तिवारी, महंत गोविंद शर्मा, मनीष पारीख, गोपाल कृष्ण गोस्वामी, सिद्धार्थ शुक्ला आदि ने संबोधित किया।
इसी क्रम में रिवर कनेक्ट कैंपेन ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर ब्रज मंडल में यमुना की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। अभियान से जुड़े बृज खंडेलवाल, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, पंडित जुगल किशोर, अभिनव, चतुर्भुज तिवारी, राहुल, दीपक राजपूत, पद्मिनी अय्यर, मुकेश चौधरी, ज्योति, विशाल झा, शाश्वत गौतम, राज कुमार माहेश्वरी, निधि पाठक, दिनेश शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि दिल्ली से लेकर मथुरा-वृंदावन-आगरा तक यमुना में गिर रहा अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक कचरा और जहरीला फोम नदी को नाले में बदल चुका है। अमोनिया स्तर 27.4 mg/L तक, BOD 70 mg/L तक और फेकल कोलीफॉर्म सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पहुंच चुका है, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि यमुना की सफाई और पुनरुद्धार के लिए समयबद्ध योजना लागू की जाए, पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित किया जाए, आगरा में यमुना बैराज निर्माण को गति दी जाए, गाद सफाई और जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाए तथा ब्रज के कुंड, वेटलैंड्स और पारंपरिक जल संरचनाओं की रक्षा की जाए।
अभियान ने स्पष्ट किया कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि ब्रज की आत्मा और सभ्यता की जीवनरेखा है। इसका ह्रास एक गहरे सभ्यतागत संकट का संकेत है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।