तुम्हारी दौलत नई-नई है…ग़ज़ल गूंजते ही झूम उठा पंडाल, देशदीप की गायकी पर बजीं तालियां
आगरा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए लगाए गए दो दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेले में आयोजित सांस्कृतिक संध्या उस समय सुरों की महफिल में बदल गई, जब ग़ज़ल और भजन गायक देशदीप शर्मा मंच पर पहुंचे। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी में आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी मधुर और भावपूर्ण गायकी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पहली ग़ज़ल पर ही गूंज उठीं तालियां
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए देशदीप शर्मा ने मशहूर ग़ज़ल- खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है… तुम्हारी दौलत नई-नई है....। पेश की। ग़ज़ल के हर शेर पर श्रोताओं ने तालियों की गूंज से पूरा पंडाल भर दिया।
सूफियाना रंग में रंगा पूरा माहौल
इसके बाद देशदीप शर्मा ने सूफियाना अंदाज़ में महान सूफी संत अमीर खुसरो का प्रसिद्ध कलाम- छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाय के...पेश किया। इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को सूफियाना रंग में रंग दिया और दर्शक देर तक झूमते नजर आए। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों ने देशदीप शर्मा की सराहना की।