1.25 करोड़ की नौकरी ठगी का आरोपी गिरफ्तार, फर्जी जॉइनिंग लेटर से लगाता था चूना

आगरा में सरकारी और संविदा पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर कथित साइबर ठगी के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने 34 वर्षीय वीरू शर्मा को गिरफ्तार किया है। न्यू जनता कॉलोनी निवासी अरविंद कुमार सक्सेना का आरोप है कि उनके बेटे को एएसआई क्लर्क की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 13.25 लाख रुपये लिए गए। आरोपी ने कथित तौर पर अधिकारियों से संपर्क होने का दावा किया और व्हाट्सऐप पर परीक्षा परिणाम की फर्जी पीडीएफ भेजी। पुलिस पूछताछ में करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी की बात सामने आई है। दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।

Oct 10, 2026 - 21:55
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1.25 करोड़ की नौकरी ठगी का आरोपी गिरफ्तार, फर्जी जॉइनिंग लेटर से लगाता था चूना
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।

आगरा। सरकारी नौकरी पाने की चाह रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों को निशाना बनाकर ठगी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। आगरा में सरकारी और संविदा पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने वीरू शर्मा (34) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक परिवार से उसके बेटे को एएसआई क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 13.25 लाख रुपये ठगने का आरोप है। पुलिस की पूछताछ में अब तक करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, ठगी की कुल रकम और अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच जारी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी और उसके साथियों ने पीड़ित परिवार का भरोसा जीतने के लिए प्रभावशाली अधिकारियों से संबंध होने का दावा किया। इसके बाद व्हाट्सऐप के माध्यम से परीक्षा परिणाम से संबंधित कथित फर्जी पीडीएफ और जॉइनिंग लेटर भेजकर नौकरी लगने का विश्वास दिलाया जाता था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। अब पुलिस बरामद मोबाइल फोन और उनमें मौजूद डिजिटल साक्ष्यों की मदद से ठगी के नेटवर्क तथा अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।

पत्नी की बीएलओ ड्यूटी के दौरान हुई थी आरोपी से मुलाकात

मामले की शुरुआत न्यू जनता कॉलोनी, मुस्तफा क्वार्टर निवासी अरविंद कुमार सक्सेना की शिकायत से हुई। अरविंद सक्सेना ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी सुनीता सक्सेना शिक्षिका हैं और रोहता क्षेत्र में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में काम देख रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात वीरू शर्मा नाम के व्यक्ति से हुई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वीरू शर्मा ने खुद को समाजसेवी बताया और दावा किया कि लखनऊ में उसकी बड़े अधिकारियों तक पहुंच है। इस परिचय के बाद आरोपी ने कथित तौर पर परिवार के साथ संपर्क बढ़ाया और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर भरोसा जीतने की कोशिश की।

एएसआई क्लर्क की नौकरी दिलाने का दिया भरोसा

आरोप है कि कुछ समय बाद वीरू शर्मा ने अरविंद सक्सेना को फोन कर बताया कि उनके बेटे ने एएसआई क्लर्क की परीक्षा दी है और वह उसका चयन करा सकता है। आरोपी ने अपने संबंध डीजीपी के पीआरओ से होने का दावा भी किया। इससे परिवार को लगा कि आरोपी की अधिकारियों तक पहुंच है और वह उनके बेटे की नौकरी लगवा सकता है। बताया गया है कि अपने दावे पर विश्वास दिलाने के लिए आरोपी ने राज शर्मा नाम के एक व्यक्ति से फोन पर बात भी कराई। उसे डीजीपी का पीआरओ बताया गया। इस तरह सरकारी अधिकारियों से कथित संपर्क और चयन कराने के आश्वासन के जरिए परिवार को भरोसे में लेने का प्रयास किया गया।

13.25 लाख रुपये लेने के बाद व्हाट्सऐप पर भेजा फर्जी परिणाम

अरविंद सक्सेना का आरोप है कि बेटे की नौकरी लगवाने का भरोसा देकर आरोपियों ने अलग-अलग मौकों पर उनसे कुल 13.25 लाख रुपये ले लिए। परिवार को यह विश्वास दिलाने के लिए कि चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, व्हाट्सऐप पर परीक्षा परिणाम से संबंधित एक पीडीएफ भी भेजी गई। कथित फर्जी परिणाम के कारण परिवार को कुछ समय तक लगा कि उनके बेटे का चयन हो गया है या नौकरी मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सरकारी नौकरी की उम्मीद में परिवार आरोपी की बातों पर भरोसा करता रहा। लेकिन बाद में जब अरविंद सक्सेना ने आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम की जांच की, तो उसमें उनके बेटे का नाम नहीं मिला। इसके बाद परिवार को भेजे गए परिणाम पर संदेह हुआ। जांच करने पर कथित तौर पर भेजी गई पीडीएफ की सच्चाई सामने आई और परिवार को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।

शिकायत के बाद साइबर क्राइम थाने पहुंचा मामला

कथित धोखाधड़ी का पता चलने के बाद अरविंद सक्सेना ने साइबर क्राइम थाने में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत में नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और व्हाट्सऐप के जरिए परीक्षा परिणाम से संबंधित दस्तावेज भेजने के आरोप लगाए गए। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने वीरू शर्मा को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अब तक करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। यह रकम कथित तौर पर किए गए व्यापक लेन-देन और ठगी के नेटवर्क की ओर इशारा करती है। हालांकि, इस रकम से जुड़े सभी मामलों, पीड़ितों की संख्या और अन्य आरोपियों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

दो मोबाइल फोन बरामद, अन्य आरोपियों की तलाश और भूमिका की जांच

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन में मौजूद व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज और अन्य जानकारियां जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी में कितने लोग शामिल थे, फर्जी दस्तावेज कहां से तैयार किए गए और नौकरी दिलाने के नाम पर रकम किन माध्यमों से ली गई। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि आरोपी ने जिन अधिकारियों से संबंध होने का दावा किया, उसका वास्तविक आधार क्या था और राज शर्मा नाम के व्यक्ति की इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों और संदिग्धों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।

सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान

यह मामला उन परिवारों के लिए भी चेतावनी है, जो अपने बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए किसी व्यक्ति के प्रभावशाली संपर्कों या ऊंचे अधिकारियों तक पहुंच होने के दावों पर भरोसा कर लेते हैं। किसी भी भर्ती में चयन की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत सूचना से ही करनी चाहिए। केवल व्हाट्सऐप पर भेजे गए परीक्षा परिणाम, नियुक्ति पत्र या जॉइनिंग लेटर को वास्तविक नहीं मानना चाहिए। नौकरी दिलाने के नाम पर निजी संपर्कों के जरिए चयन कराने का दावा करने वाले लोगों से सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध लेन-देन या डिजिटल धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत पुलिस और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। फिलहाल, आगरा साइबर क्राइम पुलिस आरोपी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के बाद ही कथित ठगी के पूरे नेटवर्क और 1.25 करोड़ रुपये की रकम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।