कृष्ण भक्ति में रंगेगा आगरा, 13 नवंबर से शुरू होगी श्रीकृष्ण लीला
आगरा में 100 वर्ष से अधिक पुरानी श्रीकृष्ण लीला महोत्सव की परंपरा इस वर्ष भी भव्य रूप में जारी रहेगी। 22 अक्टूबर को यमुना महारानी के चुनरी मनोरथ से आयोजन की शुरुआत होगी, जबकि 13 नवंबर से मुख्य लीला श्रृंखला शुरू होगी। इस बार भीष्म प्रतिज्ञा, प्रह्लाद चरित्र और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की तीन नई लीलाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी। महोत्सव में रक्तदान शिविर, पौधारोपण और फूलों की होली जैसे आयोजन भी होंगे।
आगरा में 100 साल पुरानी श्रीकृष्ण लीला की परंपरा फिर होगी जीवंत, 22 अक्टूबर से चुनरी मनोरथ, 13 नवंबर से लीला महोत्सव
आगरा। ब्रज संस्कृति, भक्ति और श्री कृष्ण की लीलाओं की अनुपम परंपरा को जीवंत करने वाला 100 वर्ष से अधिक प्राचीन श्री कृष्ण लीला महोत्सव 2026 इस बार भी श्रद्धा और भव्यता के साथ आयोजित होगा। महोत्सव की कार्यक्रम श्रृंखला की घोषणा वाटर वर्क्स स्थित अतिथि वन में आयोजित कार्यक्रम में की गई।
श्री कृष्ण लीला समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि आगरा को ब्रज धाम का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ब्रज के 12 वनों में प्रमुख अग्रवन अर्थात आगरा में श्री कृष्ण लीला की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बाल श्री कृष्ण के दर्शन के लिए स्वयं महादेव भी यहां पधारे थे। इसी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष महोत्सव की शुरुआत 22 अक्टूबर को श्री कृष्ण की पटरानी यमुना महारानी के चुनरी मनोरथ से होगी। उन्होंने बताया कि चुनरी मनोरथ के लिए गणेश राम नागर स्कूल से पार्वती घाट, बल्केश्वर तक 100 मीटर से अधिक लंबी चुनरी लेकर समिति के सदस्य एवं श्रद्धालु बैंड-बाजे और संकीर्तन के साथ पहुंचेंगे। पार्वती घाट पर विधिवत पूजा-अर्चना, दीपदान के बाद यमुना महारानी को चुनरी अर्पित की जाएगी।
भक्ति के साथ सेवा का संदेश
महोत्सव की श्रृंखला में अध्यात्म के साथ समाजसेवा को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। मानव सेवा के उद्देश्य से विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें श्री कृष्ण लीला से जुड़े कदंब एवं माखन कटोरी सहित विभिन्न पौधों का रोपण किया जाएगा।
13 नवंबर से लीला स्थल पर गूंजेगा कृष्ण नाम
महोत्सव की मुख्य लीला श्रृंखला 13 नवंबर से प्रारंभ होगी। इस दिन श्री गणेश जी की सवारी एवं कंस की दुहाई की सवारी सहित प्रमुख आयोजन नगर भ्रमण करेंगे। इस बार दोनों सवारियों का मार्ग भी बदला गया है। महादेव मंदिर, बल्केश्वर से सवारी प्रारंभ होकर महाराजा अग्रसेन मार्ग तक जाएगी। इससे कमला नगर और बल्केश्वर क्षेत्र के श्रद्धालुओं को भी सवारी के दर्शन का अवसर मिलेगा। समिति के महामंत्री विजय रोहतगी ने बताया कि 15 नवंबर से मचिया लीला का शुभारंभ शाम 6:30 बजे गौशाला प्रांगण, वाटर वर्क्स में होगा। 16 नवंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव, नंदोत्सव एवं पूतना वध, जबकि 17 नवंबर को गोचरण, कालीदह लीला एवं माखन चोरी लीला का मंचन होगा।
इस बार तीन नई लीलाएं होंगी आकर्षण का केंद्र
लीला संयोजक शेखर गोयल ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में तीन नई लीलाओं को शामिल किया गया है। 18 नवंबर को भीष्म प्रतिज्ञा, 19 नवंबर को प्रह्लाद चरित्र तथा 21 नवंबर को सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु फूलों की होली का भी आनंद ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि 25 नवंबर को हवन-पूजन एवं स्वरूपों की विदाई के साथ श्री कृष्ण लीला महोत्सव का विधिवत समापन होगा। आयोजन को लेकर समिति पदाधिकारियों ने कहा कि श्री कृष्ण लीला महोत्सव केवल लीला मंचन नहीं, बल्कि आगरा की ब्रज परंपरा, भक्ति, संस्कार, लोक संस्कृति और सामाजिक सेवा को जोड़ने वाला आध्यात्मिक उत्सव है। महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को भी श्री कृष्ण की लीलाओं और ब्रज संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर गिर्राज बंसल, विष्णु अग्रवाल राधे-राधे, महंत अनंत उपाध्याय, पंडित मुकेश शर्मा, अशोक गोयल, बृजेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, पंकज मोहन, डीके चौधरी, जवाहरलाल, लक्ष्मण शर्मा, विनीत सिंघल, वीरेंद्र गोयल, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता आदि उपस्थित रहे।