भारतीय वायुसेना की ऐतिहासिक छलांग: 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतरा 'गजराज', चीन सीमा के पास भारी विमान की लैंडिंग का विश्व रिकॉर्ड
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सामरिक ताकत और हवाई परिचालन क्षमता का नया प्रदर्शन किया है। वायुसेना के विशाल परिवहन विमान IL-76MD 'गजराज' ने समुद्र तल से 13,629 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा एयरबेस पर सफल लैंडिंग कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इतनी ऊंचाई पर इस श्रेणी के भारी विमान का उतरना भारतीय सैन्य विमानन के लिए बड़ी उपलब्धि है। विमान की लैंडिंग 6 नवंबर को हुई, जबकि वायुसेना ने 7 नवंबर को इसकी जानकारी सार्वजनिक की।
चीन सीमा के करीब रणनीतिक उपलब्धि
लद्दाख का न्योमा एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चीन के साथ वर्ष 2020 में हुए सैन्य गतिरोध के बाद इस क्षेत्र में सामरिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां भारी परिवहन विमान की सफल लैंडिंग से सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य रसद, उपकरण और जरूरी सामग्री पहुंचाने की क्षमता को नया विस्तार मिला है।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने लगभग 218 करोड़ रुपये की लागत से यहां 2.7 किलोमीटर लंबा रनवे तैयार किया है। नवंबर 2025 में तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने C-130J विमान उतारकर इस एयरबेस को परिचालन के लिए सक्रिय किया था। अब IL-76 की लैंडिंग ने इसकी परिचालन क्षमता का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा है।
एक साथ ले जा सकता है भारी सैन्य उपकरण
रूस में निर्मित चार इंजन वाला IL-76MD भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण भारी परिवहन विमानों में शामिल है। इसे 'गजराज' के नाम से भी जाना जाता है। यह विमान अपनी क्षमता के अनुसार लगभग 40 से 45 टन तक भार ले जा सकता है। सैनिकों के अलावा टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य भारी सैन्य उपकरणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
13 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर लैंडिंग बड़ी चुनौती
समुद्र तल से इतनी अधिक ऊंचाई पर भारी विमान उतारना सामान्य हवाई परिचालन से काफी अलग और चुनौतीपूर्ण होता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा का घनत्व घटता जाता है। इसका असर विमान के इंजनों की कार्यक्षमता और पंखों से मिलने वाले लिफ्ट पर पड़ता है। ऐसे वातावरण में विमान को नियंत्रित गति से उतारने के लिए पायलटों की विशेषज्ञता, रनवे की लंबाई और तकनीकी सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ेंगे सैन्य विकल्प
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के दौरान भारी परिवहन विमानों ने सैनिकों और सैन्य साजो-सामान की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। न्योमा में IL-76 की सफल लैंडिंग से अब दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी उपकरणों की हवाई आवाजाही के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होने की संभावना बढ़ी है।
यह उपलब्धि केवल एक विमान की सफल लैंडिंग तक सीमित नहीं है। यह लद्दाख जैसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में भारत के विकसित होते सामरिक बुनियादी ढांचे और सैन्य परिवहन क्षमताओं का भी परिचायक है।