न्यूटन और पास्कल के नियमों से खेलते दिखे दयालबाग के नन्हे वैज्ञानिक, 30 से अधिक मॉडल से दिखाई प्रतिभा; डीईआई की प्रयोग आधारित शिक्षा ने खींचा ध्यान

आगरा। विज्ञान के जटिल सिद्धांत जब बच्चों के हाथों तैयार मॉडलों के जरिए जीवंत हुए तो दर्शक भी उनकी प्रतिभा देखकर हैरान रह गए। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) के पी.वी. प्राथमिक विद्यालय में शनिवार को आयोजित तृतीय विज्ञान प्रदर्शनी में नन्हे विद्यार्थियों ने 30 से अधिक कार्यशील मॉडल प्रस्तुत किए। खास बात यह रही कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों ने न्यूटन के गति संबंधी नियमों और पास्कल के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझाया। जलगतिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, सौरमंडल और दयालबाग यूटोपिया पर आधारित मॉडलों ने प्रदर्शनी को खास बनाया।

Nov 7, 2026 - 22:27
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न्यूटन और पास्कल के नियमों से खेलते दिखे दयालबाग के नन्हे वैज्ञानिक, 30 से अधिक मॉडल से दिखाई प्रतिभा; डीईआई की प्रयोग आधारित शिक्षा ने खींचा ध्यान
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) के पीवी प्राइमरी विद्यालय शनिवार को आयोजित ‘तृतीय विज्ञान प्रदर्शनी’ में प्रतिभाग करने वाले बच्चे और अतिथिगण।

प्रदर्शनी की एक झलक। 

प्रदर्शनी का उद्घाटन डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने किया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और शिक्षाविदों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। बच्चों ने अपने बनाए मॉडलों की कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया कि विज्ञान के सिद्धांत रोजमर्रा की जिंदगी और आसपास की दुनिया से किस तरह जुड़े हैं। उनकी प्रस्तुति में आत्मविश्वास और विषय की समझ साफ दिखाई दी। दर्शकों ने बच्चों की रचनात्मकता के साथ शिक्षिकाओं और विद्यालय के स्टाफ की तैयारियों की भी सराहना की।

प्रदर्शनी में जलगतिकी पर आधारित कार्यशील मॉडल, पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के विकल्प, सौरमंडल की यांत्रिक संरचनाएं और दयालबाग यूटोपिया की अवधारणा को प्रदर्शित किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह दिखाया कि प्रयोग और गतिविधियां कठिन विषयों को भी सहज बना सकती हैं।

कार्यक्रम में डीईआई के नॉन-यूनिवर्सिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की डीन प्रो. सोना आहूजा ने संस्थान की शिक्षा व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीईआई के अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों में 29 स्कूल संचालित हैं। इनमें पांच स्कूल आगरा में हैं। अन्य स्कूल मध्य प्रदेश के हरदा जिले के राजबरारी और टिमरनी के अलावा एमटीवी पुरम, काकीनाड़ा और चंडीगढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

प्रो. आहूजा ने बताया कि संस्थान में शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं प्रयोग करके सीखने के अवसर देना है। इसी सोच के तहत कोरोना काल में व्यावहारिक शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए 31 जनवरी 2022 को ह्यूरिस्टिक लर्निंग सेंटर की स्थापना की गई। यहां विभिन्न किट और मॉडलों की सहायता से विद्यार्थी विषयों को समझते हैं और स्वयं प्रयोग करके ज्ञान अर्जित करते हैं।

उन्होंने कहा कि जेनरेशन अल्फा के बच्चे नई तकनीकों को तेजी से समझने और नए तरीके से सोचने की क्षमता रखते हैं। इसलिए उन्हें बड़े स्तर की कक्षाओं तक पहुंचने का इंतजार कराए बिना प्राथमिक स्तर से ही वैज्ञानिक सिद्धांतों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। पास्कल का नियम और न्यूटन के गति संबंधी नियम इसके उदाहरण हैं। सामान्यतः इनका अध्ययन मिडिल और हाई स्कूल में होता है, लेकिन डीईआई में बच्चे कम उम्र में ही मॉडल तैयार करके इन सिद्धांतों को समझ रहे हैं। विज्ञान प्रदर्शनी इसी सालभर की सीख और प्रयोगों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने का अवसर है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री जयंती माथुर ने कहा कि बचपन से वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना समय की जरूरत है। आने वाले दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स जैसी तकनीकें शिक्षा, उद्योग और जीवन के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी। इन चुनौतियों और अवसरों के लिए बच्चों को तैयार करने की शुरुआत प्राथमिक शिक्षा से ही होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि डीईआई की 1975 की शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और प्रयोगधर्मिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ पी.वी. प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थी अन्य क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालय के विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में 10वीं, 30वीं और 42वीं रैंक हासिल की है। स्केटिंग में भी विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। विद्यालय में पढ़ाई के साथ अच्छे संस्कार, परिश्रम का सम्मान और संसाधनों के अपव्यय से बचने की सीख भी दी जाती है। 'वेस्ट नथिंग' यानी कुछ भी व्यर्थ न जाने देने की आदत को विद्यार्थियों के व्यवहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाता है।

प्रदर्शनी के समापन पर मुख्य अतिथि प्रो. सी. पटवर्धन और अन्य अतिथियों ने बच्चों की वैज्ञानिक प्रतिभा, शिक्षिकाओं की मेहनत तथा विद्यालय के समस्त स्टाफ के योगदान की सराहना की।

SP_Singh AURGURU Editor