किशोरी की वापसी के बाद मानव तस्करी की भयावह हकीकत फिर उजागर

आगरा। दो महीने से ज्यादा समय बाद कोटा से वापस आगरा लौटी एक किशोरी के मामले ने एक बार फिर मानव तस्करी की भयावह हकीकत को उजागर किया है। खासकर उत्तर प्रदेश की गरीब परिवारों की लड़कियों को राजस्थान में बेचे जाने के निरंतर सामने आ रहे मामले चिंताजनक हैं। आगरा की जो किशोरी वापस लौटी है, वह महज 15 साल की है। इसे कोटा में 3.70 लाख रुपये में बेचा गया था। 62 दिन तक बंधक बनाकर इसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। अब यह आखिरकार अपने परिजनों के पास आगरा लौट आई है।

Apr 19, 2025 - 11:29
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किशोरी की वापसी के बाद मानव तस्करी की भयावह हकीकत फिर उजागर

-कोटा से बेची गई किशोरी 62 दिन बाद आगरा लौटी, कोटा की बाल कल्याण समिति भी है घेरे में

इस मामले में कोटा बाल कल्याण समिति की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि एफआईआर की शर्त के नाम पर किशोरी को दो महीने तक परिवारीजनों से अलग क्यों रखा गया? अगर उसे पहले ही सौंपा जा सकता था, तो देर क्यों हुई?

दलाल बनी जानकार महिला

जगदीशपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली किशोरी को एक महिला नौकरी का झांसा देकर गुरुद्वारा के पास स्थित होटल में ले गई। वहां उसके फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसे चार अलग-अलग लोगों को कुल 3.70 लाख रुपये में बेच दिया गया। कोटा में उससे जबरन घरेलू काम कराया गया और यौन शोषण भी किया गया।

शोषण से तंग आकर भागी, पुलिस ने भी छोड़ा अकेला

शोषण से त्रस्त होकर किशोरी ने मौका देखकर छत से कूदकर किसी तरह कैतून थाने पहुंची। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के बावजूद बाद में छोड़ दिया और किशोरी को बालिका गृह भेज दिया गया, जहां वह दो महीने तक हिरासत में रही।

पुलिस और बाल कल्याण समिति की भूमिका पर सवाल

किशोरी के परिजनों ने जब जगदीशपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, तब कोटा बाल कल्याण समिति ने 14 फरवरी को किशोरी की मौजूदगी की सूचना दी। मगर किशोरी को परिजनों को सौंपने के बजाय ‘मुकदमा दर्ज होने के बाद ही सुपुर्दगी’ की शर्त रखी गई। आखिरकार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की भनक लगते ही कोटा समिति ने आनन-फानन में आगरा पुलिस को बुलाकर किशोरी को सुपुर्द कर दिया।

तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ जरूरी

बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेस पारस ने कहा कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच मानव तस्करी का नेटवर्क बेहद मजबूत है। आगरा से लड़कियों को बहला-फुसलाकर राजस्थान और अन्य राज्यों में बेचा जाता है। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई केस सामने आ चुके हैं। उन्होंने मांग की है कि ऐसे सौदागरों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

मानव तस्करी नेटवर्क के हालिया मामले

मानव तस्करों का यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है, जो गरीब और कमजोर परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाता है। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। राजस्थान के जयपुर में एक एनजीओ द्वारा गरीब परिवारों की लड़कियों को सामूहिक विवाह के नाम पर 2.5 से 5 लाख रुपये में बेचने का मामला सामने आ चुका है। धौलपुर पुलिस ने एक महिला तस्कर को गिरफ्तार किया, जो दिल्ली से 1.5 लाख रुपये में दो महीने की बच्ची खरीदकर उसे बेचने की कोशिश कर रही थी। कानपुर की एक किशोरी को राजस्थान ले जाकर बेचने का मामला सामने आ चुका है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी मानव तस्करी के मामलों में छह राज्यों के 22 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। इन छापों का उद्देश्य संगठित तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करना था, जो पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी में शामिल हैं। ​

सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशें

सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी को दास प्रथा का आधुनिक रूप बताते हुए सभी राज्यों को 22 सिफारिशों पर अमल करने का निर्देश दिया था, जिसमें वेश्यालयों को बंद करना, तस्करों की संपत्ति जब्त करना और हर राज्य में मानव तस्करी निरोधक ब्यूरो की स्थापना शामिल है। ​

SP_Singh AURGURU Editor