वृंदावन के 500 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में गूंजा दिवाली का उल्लास, सदियों की सामाजिक बंदिशें तोड़ सैकड़ों विधवाओं ने जलाए दीप

वृंदावन। वृंदावन में कभी सामाजिक रूढ़ियों और धार्मिक मान्यताओं के चलते त्योहारों की खुशियों से दूर रखी जाने वाली विधवा महिलाओं ने शुक्रवार को ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में दीपावली का उत्सव मनाया। सैकड़ों विधवा माताओं ने मंदिर परिसर में रंग-बिरंगे दीप जलाकर खुशियां साझा कीं। यह आयोजन केवल दीपोत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक भेदभाव के खिलाफ बदलाव, सम्मान और समान धार्मिक अधिकारों का संदेश भी दे गया।

Nov 6, 2026 - 22:31
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वृंदावन के 500 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में गूंजा दिवाली का उल्लास, सदियों की सामाजिक बंदिशें तोड़ सैकड़ों विधवाओं ने जलाए दीप
वृंदावन के गोपीनाथ मंदिर में दीये जलाकर दीपावली मनातीं विधवा माताएं।

यह विशेष दीपावली समारोह सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित किया गया। संस्था का उद्देश्य विधवा महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन तथा धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में समान भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत में लंबे समय तक विधवाओं को अशुभ मानने की सामाजिक रूढ़ि के कारण उन्हें त्योहारों, मांगलिक अवसरों और धार्मिक उत्सवों से दूर रखा जाता रहा है। इस भेदभाव का सबसे अधिक असर उन महिलाओं पर पड़ा, जिन्होंने जीवनसाथी को खोने के बाद सामाजिक उपेक्षा और अकेलेपन के बीच जीवन बिताया। पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों विधवा महिलाएं दशकों से वृंदावन में रह रही हैं। उन्हें धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवों में भाग लेने के अवसर भी नहीं मिलते थे।

इन महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने महत्वपूर्ण पहल की थी। उनके प्रयासों से विधवा माताओं को सहारा मिला और उन्हें सामाजिक तथा धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का अभियान आगे बढ़ा।

सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक श्रीमती नित्या पाठक ने कहा कि वृंदावन जैसे पवित्र धार्मिक नगरों में अब बदलाव की बयार दिखाई देने लगी है। गोपीनाथ मंदिर में आयोजित यह दीपोत्सव सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि विधवा महिलाओं के जीवन में आशा, सम्मान और सामाजिक समावेश का प्रतीक है। ऐसी पहलें उन पुरानी सामाजिक मान्यताओं को बदलने में मददगार हैं, जिनके कारण महिलाओं को उनके सामान्य अधिकारों और खुशियों से वंचित रहना पड़ता था।

इस आयोजन में वृंदावन के विभिन्न आश्रय गृहों में रहने वाली बड़ी संख्या में विधवा माताएं शामिल हुईं। करीब 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुई महिलाओं ने दीप जलाए और पूरे उल्लास के साथ दीपावली मनाई। उनके चेहरों पर त्योहार की खुशी और धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने का उत्साह साफ दिखाई दिया।

समारोह में शामिल विधवा माता श्रीमती छवि दासी ने कहा कि लगातार हो रही क्रांतिकारी पहलों से विधवा माताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे खुश हैं और भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में अपने प्रवास का आनंद ले रही हैं।

उल्लेखनीय है कि सुलभ इंटरनेशनल वर्ष 2012 से वृंदावन और वाराणसी के विभिन्न आश्रमों में रहने वाली सैकड़ों विधवा माताओं की देखभाल कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में संस्था इन आश्रमों में रहने वाली महिलाओं को आवश्यक सहयोग और देखभाल उपलब्ध कराने में जुटी है।

गोपीनाथ मंदिर में मनाया गया यह दीपोत्सव उन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जिन्हें कभी सामाजिक रूढ़ियों के कारण त्योहारों की खुशियों से दूर रखा जाता था। मंदिर में जलते दीपों ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था, उत्सव और खुशियों पर किसी का सामाजिक दर्जा या वैवाहिक स्थिति प्रतिबंध नहीं लगा सकती।

SP_Singh AURGURU Editor