30 लाख दीयों से जगमगाई रामनगरी, सरयू के 56 घाटों पर उतरा रोशनी का समंदर; योगी ने अखिलेश को दी नसीहत- रामभक्तों से माफी मांगकर अयोध्या आएं

अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या शनिवार की शाम आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव की अद्भुत रोशनी से नहा उठी। सरयू नदी के किनारे राम की पैड़ी समेत 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये एक साथ प्रज्ज्वलित हुए तो ऐसा लगा मानो धरती पर तारों का संसार उतर आया हो। सरयू के जल में झिलमिलाते दीपों की परछाइयां, मंदिरों की रोशनी, शंखनाद, घंटियों की गूंज और जय श्रीराम के उद्घोष ने पूरी रामनगरी को उत्सवमय बना दिया।

Nov 8, 2026 - 01:06
 0
30 लाख दीयों से जगमगाई रामनगरी, सरयू के 56 घाटों पर उतरा रोशनी का समंदर; योगी ने अखिलेश को दी नसीहत- रामभक्तों से माफी मांगकर अयोध्या आएं
सरयू तट पर दीयों से झिलमिलाती अयोध्या नगरी।

सरयू तट पर आरती करते सीएम योगी आदित्यनाथ।

दीपोत्सव के दसवें आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने समारोह को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। जहां एक ओर दीपों के महासागर ने अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए रामभक्तों और संतों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगने की नसीहत दी।

56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीप, 35 हजार स्वयंसेवकों ने रचा रोशनी का संसार

अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां कई दिन पहले से चल रही थीं। सरयू नदी के दोनों किनारों पर बने 56 घाटों पर दीप सजाने के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों सहित करीब 35 हजार लोगों ने भागीदारी की। तीन दिनों तक चले अभियान में घाटों पर लाखों मिट्टी के दीयों को निर्धारित आकृतियों और कतारों में सजाया गया। आयोजन से पहले उनमें तेल भरने और रूई की बातियां लगाने का काम पूरा किया गया।

शनिवार शाम सूर्यास्त के बाद जैसे ही दीप प्रज्ज्वलित होने शुरू हुए, राम की पैड़ी से लेकर सरयू के दूसरे घाटों तक रोशनी की लंबी श्रृंखला दिखाई देने लगी। देखते ही देखते 30 लाख से अधिक दीपों की लौ ने नदी तट को आलोकित कर दिया। घाटों की सीढ़ियां, मंदिरों के आसपास के परिसर और नदी किनारे के रास्ते दीपों की कतारों से चमक उठे। सरयू के पानी में प्रतिबिंबित होती रोशनी ने दृश्य को और भी आकर्षक बना दिया।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में भी करीब एक लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए। मंदिर के विभिन्न हिस्सों और परिसर के मंदिरों को विशेष सजावट और रोशनी से सजाया गया। इस प्रकार रामनगरी के व्यापक क्षेत्र में 70 लाख से अधिक दीप जलाए जाने का आयोजन रखा गया।

दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब पहले आयोजन में करीब 1.71 लाख दीप जलाए गए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 26.17 लाख हो गई थी। दसवें आयोजन में 30 लाख से अधिक दीपों के साथ इस परंपरा ने एक और बड़ा पड़ाव हासिल किया।

2100 ड्रोन ने आसमान में साकार किए रामायण के प्रसंग

इस बार दीपोत्सव केवल मिट्टी के दीयों तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम भी देखने को मिला। करीब 2100 स्वदेशी ड्रोन की मदद से आसमान में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को आकर्षक आकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। आकाश में उभरती आकृतियों ने भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण की कथा को नए अंदाज में प्रस्तुत किया।

राम की पैड़ी और सरयू तट पर लेजर शो तथा रंग-बिरंगी रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से निकाली गई शोभायात्रा में रामचरितमानस और सरकारी योजनाओं पर आधारित 21 झांकियां शामिल रहीं। शोभायात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर रामकथा पार्क पहुंची। रास्ते में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों, ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रमों में पांच देशों के कलाकारों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। करीब एक हजार कलाकारों की भागीदारी ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया उद्घाटन, रामलला के दर्शन और सरयू आरती में हुए शामिल

दीपोत्सव के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार को अयोध्या पहुंचे। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। उपराष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया।

रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और गुरु वशिष्ठ के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक की रस्म संपन्न हुई। उपराष्ट्रपति ने भगवान श्रीराम का राजतिलक किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूजा-अर्चना और आरती में हिस्सा लिया।

इसके बाद उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री सरयू तट पर पहुंचे और आरती में शामिल हुए। राम की पैड़ी पर दीपों की जगमगाहट के बीच आयोजित मुख्य समारोह में उपराष्ट्रपति ने दीपोत्सव की बढ़ती लोकप्रियता की सराहना की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव आज जनभागीदारी और सामूहिक आस्था का बड़ा उत्सव बन चुका है। लाखों दीप करोड़ों भारतीयों के जीवन में आ रहे बदलाव और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने आयोजन में कुम्हारों, ग्रामीण महिलाओं, शिल्पकारों, कलाकारों, होटल और होमस्टे संचालकों, गाइड तथा परिवहन से जुड़े लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसरों का भी उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या में सड़क, घाट, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, आवास और रेल एवं हवाई संपर्क में सुधार से श्रद्धालुओं का अनुभव बदला है। अयोध्या विकास और विरासत के समन्वय का उदाहरण बन रही है।

योगी का अखिलेश पर निशाना, बोले- रामभक्तों और संतों से माफी मांगकर अयोध्या आएं

दीपोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में अखिलेश का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को अखिलेश यादव की प्रस्तावित अयोध्या यात्रा से जोड़कर देखा गया। समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या आने की घोषणा की गई है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, संतों का अपमान किया और उन पर लाठियां बरसाईं, उन्हें अयोध्या जरूर आना चाहिए, लेकिन पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम उदार हैं और सबको क्षमा कर देते हैं।

मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वर्ष 1990 में कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग का संदर्भ भी दिया। उस समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी। योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब अयोध्या में राम का नाम लेने पर भी लाठियां चलती थीं और रामभक्तों को गोलियों का सामना करना पड़ा था। आज वही अयोध्या अपनी सांस्कृतिक पहचान और गौरव के साथ आगे बढ़ रही है।

उन्होंने राम जन्मभूमि मामले में अदालतों में भगवान श्रीराम के अस्तित्व को लेकर हुई कानूनी बहस का उल्लेख करते हुए इसे वैचारिक विजय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, माता शबरी और महाराज जटायु से जुड़े धार्मिक स्थलों की भी पहचान स्थापित हो रही है।

अयोध्या के विकास और बदली व्यवस्था का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक इस धार्मिक नगरी की उपेक्षा हुई। पहले यहां बुनियादी सुविधाओं और बिजली व्यवस्था को लेकर परेशानियां थीं, लेकिन अब शहर की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने अयोध्या में विकसित हुई नई सुविधाओं, बेहतर संपर्क व्यवस्था और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर बने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उल्लेख किया।

योगी ने कहा कि अयोध्या अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उदाहरण बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण और अयोध्या के विकास को उन्होंने लंबे समय से चली आ रही जनभावना की पूर्ति बताया।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और दोनों उपमुख्यमंत्री भी रहे मौजूद

दीपोत्सव के दसवें आयोजन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित प्रदेश सरकार के मंत्री, संत-महात्मा और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। राज्यपाल ने अयोध्या में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यटन गतिविधियों को स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा।

आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को 20 जोन और 53 सेक्टर में बांटा गया। पुलिस, पीएसी, आरएएफ और एटीएस की टीमें तैनात रहीं। सरयू नदी में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली।

अयोध्या का दसवां दीपोत्सव इस बार दीपों की संख्या, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, ड्रोन शो और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी के कारण खास रहा। 30 लाख से अधिक दीपों की रोशनी ने सरयू तट को भव्य दृश्य में बदल दिया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के संगम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक संदेश भी समारोह की प्रमुख चर्चाओं में शामिल रहा।

SP_Singh AURGURU Editor