पुरुषोत्तम मास में आगरा भक्तिरस में सराबोर, यमुना तट से समाधि पार्क तक कथा मंडपों में जयकारे, संकीर्तन और दिव्य झांकियों ने मोहा मन
आगरा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आगरा नगरी इन दिनों भक्ति, संकीर्तन और आध्यात्मिक उत्सवों से सराबोर दिखाई दे रही है। यमुना तट स्थित कथा मंडपों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की जयकारों से वातावरण गूंज उठा तो कहीं सखी वेश उत्सव में ठाकुरजी के अलौकिक स्वरूप ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा, संकीर्तन, यमुना आरती, पुष्पवर्षा और प्रसादी वितरण के बीच पूरा शहर मानो व्रजधाम की आध्यात्मिक अनुभूति से आलोकित हो उठा।
जहां सुमति होती है, वहीं बसती है संपत्ति और सुख: महंत योगेश पुरी
ताज व्यू गार्डन फेस-1 पार्किंग एरिया, यमुना किनारा रोड पर चल रहे श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ में गुरुवार को भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। कथा मंडपम श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और “नंद के आनंद भयो” तथा “बृज में हो रही जय-जयकार” जैसे मंगल गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा व्यास महंत योगेश पुरी ने भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं से 108 बार “राम” नाम का जाप कराया। उन्होंने कहा कि जहां सुमति होती है, वहीं संपत्ति, सुख और समृद्धि का वास होता है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग में भगवान के प्राकट्य का वर्णन होते ही श्रद्धालु जयकारों के साथ खड़े हो गए और पूरा मंडपम नंदोत्सव के उल्लास में डूब गया।
यमुना तट पर जगमग रोशनी, 24 फुट ऊंचे श्रीनाथजी के स्वरूप, द्वादश ज्योतिर्लिंग एवं भगवान के 24 अवतारों की झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। कथा के पश्चात भव्य यमुना आरती ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि प्रतिदिन बाल संस्कार शिविर में बच्चों को गीता, योग और भारतीय संस्कृति की शिक्षा दी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निशुल्क ई-रिक्शा सेवा भी संचालित की जा रही है।
दैनिक यजमान के रूप में गोपाल बंसल, शालिनी बंसल, सोनू गुप्ता, सीमा गुप्ता, विनोद गुप्ता, सरोज गुप्ता, सुमित गुप्ता एवं श्वेता गुप्ता ने व्यास पूजन किया।
बलि महाराज से श्रीकृष्ण जन्म लीला तक, भागवत कथा में मिला समर्पण और भक्ति का संदेश

सूर्य नगर स्थित समाधि पार्क मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में प्रवचन करते कथा व्यास सार्वभौम प्रभु।
सूर्य नगर स्थित समाधि पार्क मंदिर में इस्कॉन आगरा एवं राधा सखी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भक्ति धारा में डूबे नजर आए। “हरे कृष्ण हरे कृष्ण” महामंत्र के संकीर्तन, भजन और नृत्य के बीच पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा।
कथा व्यास सार्वभौम प्रभु ने बलि महाराज चरित्र, सूर्य वंश, चंद्र वंश और श्रीकृष्ण जन्म लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीव को समर्पण, भक्ति और निष्कपट प्रेम का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि भगवान भक्त के त्याग और प्रेम से प्रसन्न होकर स्वयं उसके रक्षक बन जाते हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग के दौरान वेदिक मंत्रोच्चारण के बीच ठाकुरजी का दिव्य अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई और माखन-मिश्री एवं उपहार वितरित किए गए। कथा व्यास ने “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि कलियुग में भगवान का नाम ही सबसे बड़ा आश्रय है।
राधा सखी ग्रुप की संस्थापिका अशु मित्तल ने बताया कि शुक्रवार को श्रीकृष्ण बाल लीलाएं, गोवर्धन लीला, रास पंचाध्याय एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग होंगे।
कार्यक्रम में महापौर हेमलता दिवाकर, एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल, डॉ. रंजना बंसल, जीएसटी कमिश्नर निहारिका खंडेलवाल, सीमा एवं अरविंद स्वरूप प्रभु सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्री प्रेमनिधि मंदिर में सखी वेश उत्सव के दिव्य दर्शन, स्वामिनी भाव में रमे श्रद्धालु

नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि मंदिर में सखी वेश उत्सव के दौरान ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज के दिव्य दर्शन करते श्रद्धालु।
नाई की मंडी स्थित प्राचीन श्री प्रेमनिधि मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम (अधिक मास) मनोरथ उत्सव के अंतर्गत बुधवार को ‘सखी वेश उत्सव’ श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। पुष्टिमार्गीय भक्त प्रेमनिधि जी के सेवित ठाकुर श्री श्याम बिहारी (श्री बड़े गोविन्द) जी महाराज को सखी स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार धारण कराया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
मंदिर परिसर पुष्प सज्जा, संकीर्तन और भक्ति रस से आलोकित रहा। श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के समक्ष नृत्य-कीर्तन कर अपनी भावनाएं अर्पित कीं। मुख्य सेवायत हरी मोहन गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्ग में ‘सखी वेश’ अथवा ‘स्वामिनी भाव’ की सेवा को प्रेमाभक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है।
उन्होंने कहा कि इस भाव में भक्त स्वयं को ठाकुरजी की अंतरंग सखी मानकर सेवा करता है और यही भाव भक्त एवं भगवान के मधुर संबंध की अनुभूति कराता है।
आज के उत्सव की सेवा स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा समर्पित की गई। सेवा में विनीता मित्तल, वंशिका गोस्वामी, भक्ति गोस्वामी, आशीष पचौरी, दीपक सैनी, साहिल, अक्षत पचौरी, सरदार सिंह धाकड़, रीना गोस्वामी, अमित शर्मा एवं आशीष अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा।