ईरान–अमेरिका शांति वार्ता की उम्मीद से कच्चे तेल में तेज गिरावट, ब्रेंट क्रूड 2.6% से 4.7% तक टूटा, WTI में भी बड़ी गिरावट
तेहरान/वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं ने वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव ला दिया है। मध्य-पूर्व में तनाव कम होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका घटने के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजार, शेयर बाजार और महंगाई के अनुमान प्रभावित हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग $2.67 से $3.11 प्रति बैरल तक की गिरावट दर्ज की गई है, जो लगभग 2.6% से 4.7% तक की कमजोरी मानी जा रही है। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड में भी करीब $3.43 से $3.64 प्रति बैरल तक की गिरावट देखी गई है, जो लगभग 3.6% से 5.6% तक की गिरावट के दायरे में है। इस गिरावट के बाद कच्चा तेल हाल के दिनों की तुलना में दो सप्ताह के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों से आई है, जिससे मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। अगर यह शांति समझौता आगे बढ़ता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को राहत मिलेगी और तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, जैसे ही तनाव कम होने की संभावना बनी, बाजार में जोखिम प्रीमियम तेजी से घट गया, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। निवेशकों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हो सकता है, जिससे कीमतों में बिकवाली बढ़ गई।
तेल की कीमतों में इस गिरावट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा रहा है। ऊर्जा लागत में कमी से आने वाले समय में महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि एयरलाइन, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत मिल सकती है। हालांकि दूसरी ओर तेल उत्पादक देशों और ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फिलहाल यह स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता अभी प्रारंभिक या संभावित चरण में मानी जा रही है। ऐसे में यदि बातचीत में कोई रुकावट आती है या राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी भी देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर ईरान–अमेरिका शांति वार्ता की खबरों ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है और ब्रेंट व WTI दोनों में 3% से 5% तक की गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं।