इज़राइल में राजनीतिक संकट गहराया, नेतन्याहू सरकार के समक्ष चुनौती, संसद भंग और जल्द चुनाव की चर्चाएं तेज

तेल अवीव। इज़राइल की राजनीति एक बार फिर बड़े संकट के दौर में पहुंच गई है, जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर गंभीर दबाव बढ़ गया है। संसद (नेसेट) में आंतरिक मतभेद, सहयोगी दलों की नाराज़गी और नीतिगत फैसलों को लेकर टकराव ने सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में संसद भंग होने और समय से पहले चुनाव की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

May 28, 2026 - 19:08
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इज़राइल में राजनीतिक संकट गहराया, नेतन्याहू सरकार के समक्ष चुनौती, संसद भंग और जल्द चुनाव की चर्चाएं तेज

सूत्रों के अनुसार, गठबंधन सरकार में शामिल कुछ छोटे दल सुरक्षा नीति, युद्ध-प्रबंधन रणनीति और बजट आवंटन को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। विपक्षी दल लगातार अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

वामपंथी झुकाव वाले प्रमुख नेसेट सदस्य यायर गोलान ने इसे इज़राइल के इतिहास की सबसे खराब सरकार के अंत की शुरुआत बताया। बेंजामिन नेतन्याहू पिछले 30 वर्षों में से 20 साल तक इज़राइल के प्रधानमंत्री रहे हैं, जिनमें पिछले चार वर्षों से वे एक दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को लेकर सरकार के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। एक ओर नेतन्याहू सरकार सख्त सुरक्षा नीति के पक्ष में है, वहीं गठबंधन के कुछ सहयोगी दल युद्ध और आर्थिक बोझ को लेकर नरम रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि मौजूदा तनाव इसी तरह जारी रहा तो संसद भंग करने की स्थिति बन सकती है, जिसके बाद इज़राइल में मध्यावधि चुनाव कराए जाने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे देश की राजनीति में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल पैदा हो सकता है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह आंतरिक मतभेदों को संभालने में विफल रही है और देश को राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल रही है। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि कठिन समय में स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है और गठबंधन जल्द ही मतभेद सुलझा लेगा।

फिलहाल इज़राइल की संसद में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हैं और सभी दल आगामी रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी या देश एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया में जाएगा।

SP_Singh AURGURU Editor