ताजमहल से ताजगंज तक विरासत की उड़ान, यूनेस्को ने बच्चों और कारीगरों को जोड़ा सांस्कृतिक धरोहर से

आगरा। विश्व धरोहर ताजमहल की छाया में बसे ताजगंज की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने और स्थानीय समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यूनेस्को ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्कृति और कला शिक्षा सप्ताह-2026 के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम "ताजमहल से ताजगंज तक : जीवंत विरासत के माध्यम से एक कबूतर की यात्रा" का शनिवार को बाग फरजाना स्थित संस्कृति भवन में भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक शिक्षा, स्थानीय कारीगरों के सशक्तिकरण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

May 30, 2026 - 22:15
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ताजमहल से ताजगंज तक विरासत की उड़ान, यूनेस्को ने बच्चों और कारीगरों को जोड़ा सांस्कृतिक धरोहर से
संस्कृति भवन में यूनेस्को की ओर से आयोजित ताजमहल से ताजगंज तक परियोजना की डीआईवाई किट का विमोचन करते महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह, मंडलीय वन अधिकारी राजेश कुमार, पर्यावरण अधिकारी पंकज भूषण, अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. स्मिता एस. कुमार, हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी रामजी त्रिपाठी एवं अन्य अतिथि।

कार्यक्रम का उद्घाटन महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह, मंडलीय वन अधिकारी (डीएफओ) राजेश कुमार, नगर निगम के पर्यावरण अधिकारी पंकज भूषण, अधीक्षक पुरातत्वविद् (एएसआई) डॉ. स्मिता एस. कुमार, हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी रामजी त्रिपाठी, प्रील्यूड स्कूल की प्रधानाचार्य सीमा सहजपाल, एक पहल संस्था के संस्थापक मनीष राय तथा आहार विशेषज्ञ डॉ. रेनुका डंग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने कहा कि दो वर्ष पूर्व यूनेस्को से जुड़ने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि वर्तमान पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से अनभिज्ञ है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को ताजगंज क्षेत्र के बच्चों को उनकी पारंपरिक कला, संस्कृति और विरासत से परिचित कराने का सराहनीय कार्य कर रहा है। इससे न केवल बच्चों में अपनी पहचान के प्रति गर्व की भावना विकसित होगी बल्कि स्थानीय कलाओं को भी नया मंच मिलेगा।

संस्कृति और शिक्षा को जोड़ने का अनूठा प्रयास

यूनेस्को दक्षिण एशिया की प्रतिनिधि स्नेहा बोरेटे ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों, शिक्षकों, कारीगरों, समुदाय प्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन और सांस्कृतिक विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाकर विरासत आधारित शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और कला शिक्षा सप्ताह बच्चों और युवाओं को उनकी पहचान, समुदाय और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

विरासत संरक्षण के साथ कारीगरों की आजीविका पर भी फोकस

यूनेस्को परियोजना प्रभारी शांतनु जादौन ने बताया कि विरासत केवल अतीत को सहेजने का माध्यम नहीं है, बल्कि वर्तमान में समुदायों को सशक्त बनाकर भविष्य को सुरक्षित बनाने का भी आधार है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को की परियोजना विशेष रूप से ताजगंज क्षेत्र के पच्चीकारी (पत्थर जड़ाई) कारीगरों को मजबूत करने, उनकी आजीविका बढ़ाने, कौशल विकास और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

कार्यक्रम में यूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख निदेशक टिम कर्टिस भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उन्होंने बच्चों को उनके सांस्कृतिक परिवेश, स्थानीय परंपराओं और समुदायों के आपसी संबंधों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

डीआईवाई किट से बच्चों तक पहुंचेगी ताजगंज की सांस्कृतिक कहानी

एक पहल संस्था की अध्यक्ष डॉ. ईभा गर्ग ने बताया कि यूनेस्को और एक पहल संस्था के सहयोग से अंग्रेजी एवं हिंदी भाषा में विशेष डीआईवाई (डू इट योरसेल्फ) किट तैयार की गई है, जिसका कार्यक्रम में औपचारिक विमोचन किया गया। यह किट बच्चों को ताजगंज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और जीवंत इतिहास से रोचक तरीके से परिचित कराएगी।

उन्होंने बताया कि रविवार को दयालबाग स्थित एक पहल पाठशाला में सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के लगभग 50 शिक्षकों को इस किट के उपयोग और विरासत आधारित शिक्षण पद्धति का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि इसकी जानकारी अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सके।

कारीगरों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के दौरान ताजगंज के पच्चीकारी कारीगरों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार यह कला पीढ़ियों से उनके परिवारों की पहचान बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूनेस्को की यह पहल स्थानीय कारीगरों को नई पहचान और बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी।

इस अवसर पर अंकित खंडेलवाल, मानस राय, नवीन कुमार, अश्लेष मित्तल, सुरभि कुमारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षक, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor