बरेली के मनौना धाम से बच्चे के अपहरण का मामलाः मासूमों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह के तीन और सदस्य दबोचे, अब तक छह गिरफ्तार
-आरके सिंह- बरेली। मनौना धाम से डेढ़ वर्षीय बच्चे के अपहरण के मामले में बरेली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। आंवला थाना पुलिस ने बच्चा चोरी और खरीद-फरोख्त करने वाले संगठित गिरोह के तीन और शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से धार्मिक स्थलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से बच्चों का अपहरण कर उन्हें मोटी रकम लेकर बेचने का काम कर रहा था। मामले में अब तक कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अपहृत बालक ऋषभ को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है।
मनौना धाम से लापता हुआ था डेढ़ वर्षीय ऋषभ
बरेली की पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) अंशिका वर्मा ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि 24 मई 2026 को बदायूं जिले के उसैत थाना क्षेत्र के गांव ढढरिया असगुना निवासी रमन पुत्र रविंद्र ने थाना आंवला में सूचना दी थी कि वह मनौना धाम में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। घटना वाले दिन उसके तीनों बच्चे खेलते हुए सड़क की ओर चले गए थे। कुछ देर बाद दो बच्चे वापस लौट आए, लेकिन उसका डेढ़ वर्षीय पुत्र ऋषभ रहस्यमय ढंग से लापता हो गया।
सूचना मिलते ही पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए थे पहले दो आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने 27 मई को योगेश कन्नौजिया और पवन चंदेल को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। दोनों की निशानदेही पर अपहृत बालक ऋषभ को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने लखीमपुर खीरी निवासी उत्तम बाजपेई की संलिप्तता उजागर की, जिसके बाद पुलिस ने 29 मई को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
तीन और सदस्य गिरफ्तार, गिरोह का नेटवर्क उजागर
उत्तम बाजपेई से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने शनिवार को सघन चेकिंग अभियान और मुखबिर की सूचना के आधार पर तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में संजय कुमार विश्वास निवासी नादिया, पश्चिम बंगाल (हाल निवासी सीतापुर), केशवराम उर्फ मंजेश निवासी लखीमपुर खीरी, सीता निवासी बदायूं (हाल निवासी मीरगंज, बरेली) शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों के साथ ही इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या छह हो गई है।
मंदिरों और अस्पतालों से बच्चों को बनाते थे निशाना
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से बच्चों की खरीद-फरोख्त के अवैध कारोबार में लिप्त थे। गिरोह के सदस्य भीड़भाड़ वाले मंदिरों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे बच्चों की तलाश करते थे जो अपने परिजनों से बिछड़ जाएं या अकेले मिल जाएं। इसके बाद उनका अपहरण कर उन्हें दूसरे लोगों को बेच दिया जाता था।
एक बच्चे की कीमत डेढ़ लाख के करीब
जांच में सामने आया कि गिरोह का सक्रिय सदस्य उत्तम बाजपेई अपने साथियों योगेश और पवन के साथ बच्चों का अपहरण करता था। इसके बाद बच्चों को सीता के माध्यम से खरीदारों तक पहुंचाया जाता था। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि इससे पहले भी एक-एक बच्चे की बिक्री की जा चुकी है।
पुलिस के अनुसार एक बच्चे के बदले गिरोह को लगभग एक लाख बीस हजार रुपये तक मिलते थे, जिसे सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।
और भी मामलों की जांच में जुटी पुलिस
एसपी अंशिका वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह की अन्य गतिविधियों और संभावित मामलों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक इस गिरोह ने कितने बच्चों का अपहरण किया, किन-किन राज्यों तक नेटवर्क फैला हुआ है और इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना आंवला में दर्ज मुकदमा संख्या 278/26 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2), 143(4) और 61(2) के तहत कार्रवाई की गई है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका
मामले के सफल खुलासे में उपनिरीक्षक नरेन्द्र सिंह राघव, वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मपाल सिंह, हेड कांस्टेबल श्याम सिंह, कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल प्रियांशु तथा महिला कांस्टेबल छाया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने पूरी टीम की सराहना करते हुए इसे संवेदनशील मामले में बड़ी सफलता बताया है।