टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पत्थर, अंडे और जूते फेंके गए, बंगाल में राजनीतिक घमासान तेज

सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर अंडे, पत्थर और जूते फेंके गए। अभिषेक ने इसे "बीजेपी प्रायोजित हमला" बताते हुए जान से मारने की साजिश का आरोप लगाया। टीएमसी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी ने घटना की निंदा की, लेकिन जनता में टीएमसी के खिलाफ आक्रोश की बात कही। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने हमले की निंदा की। घटना ऐसे समय हुई है जब सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को एक अन्य मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा है। इस हमले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद और टकराव खड़ा कर दिया है।

May 31, 2026 - 00:56
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टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर पत्थर, अंडे और जूते फेंके गए, बंगाल में राजनीतिक घमासान तेज
मारपीट की घटना के बाद भाजपा पर आरोप लगाते अभिषेक बनर्जी।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में कथित हमले के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। इस घटना ने न केवल टीएमसी और बीजेपी के बीच टकराव को और तेज कर दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों को भी एकजुट होकर प्रतिक्रिया देने का मौका दे दिया है।

शनिवार को अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक व्यक्ति के परिवार से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके काफिले को घेर लिया। आरोप है कि हमलावरों ने उन पर अंडे, पत्थर और जूते फेंके तथा धक्का-मुक्की और मारपीट की कोशिश की। घटनास्थल पर मौजूद भीड़ द्वारा "चोर-चोर" के नारे लगाए जाने की भी खबर सामने आई है।

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने अभिषेक बनर्जी को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। टीएमसी का आरोप है कि हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी थी और प्रशासन समय पर अतिरिक्त बल भेजने में विफल रहा।

अभिषेक का आरोप-बीजेपी प्रायोजित हमला

हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने सीधे तौर पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह हमला सुनियोजित था और उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि हमलावरों को पहले से एक कम्युनिटी हॉल में इकट्ठा किया गया था और उनके पास घटना के वीडियो सबूत मौजूद हैं।

अभिषेक ने कहा कि उनके ऊपर ईंट और पत्थर फेंके गए, जिससे उनकी आंख में चोट लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता तो गंभीर हादसा हो सकता था। उन्होंने इस मामले को अदालत तक ले जाने और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की भी बात कही।

टीएमसी का पलटवार, बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  ने सोशल मीडिया पर हमले का वीडियो साझा करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि कुछ अस्पतालों पर भी दबाव बनाया गया ताकि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

बीजेपी ने निंदा की, लेकिन जनता के आक्रोश का भी किया जिक्र

केंद्रीय मंत्री सुकान्त मजूमदार ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता में टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ व्यापक आक्रोश है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, लेकिन यह आत्ममंथन का विषय है कि जनता में इतना गुस्सा क्यों पैदा हुआ।

विपक्षी दलों का समर्थन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि किसी निर्वाचित सांसद पर हमला जनता के जनादेश पर हमला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी घटना की कड़ी निंदा की और सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इतनी संवेदनशील स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।

सीआईडी के समन से बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता

घटना ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल सीआईडी ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। टीएमसी इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जांच एजेंसियों की नियमित प्रक्रिया बता रहा है।

राजनीतिक संदेश और असर

सोनारपुर की घटना केवल एक सुरक्षा चूक या स्थानीय विरोध का मामला नहीं रह गई है। यह अब बंगाल में राजनीतिक हिंसा, लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर बड़े राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर टीएमसी और बीजेपी के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब राज्य पहले से ही चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक ध्रुवीकरण के आरोपों से घिरा हुआ है।