कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान, तीन बजे राज्यपाल को सौंप देंगे इस्तीफा, डीके शिव कुमार का रास्ता हुआ साफ, सुबह मंत्रियों के साथ बैठक में बताया अपना फैसला, भावुक डीके ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा सत्ता संघर्ष आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बुधवार सुबह अपने सरकारी आवास पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई अनौपचारिक नाश्ता बैठक में उन्होंने खुद इस्तीफा देने की घोषणा की। अब मुख्यमंत्री अपराह्न तीन बजे राज्यपाल से मुलाकात कर औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपेंगे। सिद्धारमैया के इस फैसले के साथ ही उप मुख्यमंत्री डीके शिव कुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व के भीतर महीनों से चल रही खींचतान अब सत्ता परिवर्तन के फैसले में बदल चुकी है।

May 28, 2026 - 11:17
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान, तीन बजे राज्यपाल को सौंप देंगे इस्तीफा, डीके शिव कुमार का रास्ता हुआ साफ, सुबह मंत्रियों के साथ बैठक में बताया अपना फैसला, भावुक डीके ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद
गले मिलते सिद्धारमैया और डीके शिव कुमार। दूसरे चित्र में सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लेते डीके शिव कुमार।

मुख्यमंत्री आवास पर हुआ बड़ा राजनीतिक फैसला

मुख्यमंत्री आवास पर बुधवार सुबह हुई बैठक को पहले सामान्य राजनीतिक चर्चा माना जा रहा था, लेकिन कुछ ही देर में यह बैठक कर्नाटक की राजनीति की सबसे बड़ी खबर बन गई।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने कैबिनेट सहयोगियों से कहा कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ने जा रहे हैं। इस घोषणा के बाद बैठक का माहौल भावुक हो गया।

उप मुख्यमंत्री डीके शिव कुमार तुरंत उठकर सिद्धारमैया के पास पहुंचे, उन्हें गले लगाया और फिर पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान डीके शिव कुमार बेहद भावुक दिखाई दिए। बैठक में मौजूद कई मंत्रियों ने इसे कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण का ऐतिहासिक क्षण बताया।

मंगलवार को ही मिल गए थे संकेत

दरअसल, मंगलवार को ही सिद्धारमैया ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा था। उसी समय से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या मुख्यमंत्री पद पर बड़ा फैसला होने वाला है।

हालांकि कांग्रेस हाईकमान की ओर से किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी, इसलिए इसे केवल अटकल माना जा रहा था। लेकिन बुधवार सुबह मुख्यमंत्री के ऐलान ने सारे कयास खत्म कर दिए।

2023 में ही तय हो गया था सत्ता का फार्मूला

वर्ष 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई थी।

एक तरफ सिद्धारमैया थे, जिनके पास अनुभव, जनाधार और संगठन पर मजबूत पकड़ थी। दूसरी ओर डीके शिव कुमार थे, जिन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।

दोनों नेता मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार बन गए थे। उस समय कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाने की थी।

आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने ढाई-ढाई साल का फार्मूला तैयार किया। इसके तहत पहले ढाई साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद के ढाई साल के लिए डीके शिव कुमार को नेतृत्व सौंपने पर सहमति बनी।

ढाई साल पूरे होने के बाद बढ़ा दबाव

समय सीमा पूरी होने के बाद डीके शिव कुमार ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। हालांकि पहली बार वे अपने प्रयास में सफल नहीं हो पाए।

लेकिन इसके बाद भी उन्होंने लगातार राजनीतिक दबाव बनाए रखा। पिछले छह महीनों से कर्नाटक कांग्रेस के भीतर लगातार बैठकों, रणनीतियों और शक्ति प्रदर्शन का दौर चल रहा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस बार भी नेतृत्व परिवर्तन नहीं होता तो कांग्रेस के भीतर बड़ा असंतोष खुलकर सामने आ सकता था।

दिल्ली में हुई छह घंटे की निर्णायक बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने एक दिन पहले ही सिद्धारमैया और डीके शिव कुमार को दिल्ली बुलाया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दोनों नेताओं के साथ करीब छह घंटे तक लंबी बैठक की। इस दौरान सत्ता हस्तांतरण, संगठन संतुलन और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक खत्म होने के बाद दोनों नेता कर्नाटक लौट आए थे, लेकिन उसी समय से संकेत मिलने लगे थे कि कांग्रेस नेतृत्व अब अंतिम फैसला कर चुका है।

सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका!

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में अहम जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है।

बताया जा रहा है कि उन्हें राज्यसभा भेजकर संसद में नेता विपक्ष की भूमिका देने पर विचार किया गया है। इससे एक ओर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन आसान होगा तो दूसरी ओर सिद्धारमैया की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी बरकरार रहेगी।

कांग्रेस ने टाल दिया बड़ा राजनीतिक संकट

कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले को बड़े राजनीतिक संकट को टालने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

अगर नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला और टलता तो कर्नाटक कांग्रेस के भीतर खुली बगावत की स्थिति पैदा हो सकती थी। खासतौर पर आगामी राज्यसभा चुनाव और संगठनात्मक समीकरणों को देखते हुए यह स्थिति पार्टी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी।

कांग्रेस नेतृत्व ने समय रहते हस्तक्षेप कर एक ओर सिद्धारमैया को सम्मानजनक विदाई देने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर लगातार दबाव बना रहे डीके शिव कुमार की राह भी आसान कर दी।

अब पूरे देश की नजरें आज अपराह्न तीन बजे पर टिकी हैं, जब सिद्धारमैया राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे और कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा।

SP_Singh AURGURU Editor