एआई तकनीकी से बदलेगा शोध का भविष्य, दयालबाग शिक्षण संस्थान में शुरू हुआ राष्ट्रीय स्तर का पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम
आगरा स्थित दयालबाग शिक्षण संस्थान में शैक्षणिक अनुसंधान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। ‘शैक्षणिक अनुसंधान में एआई उपकरण के अनुप्रयोग’ विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारम्भ 18 मई 2026 को एआईयू-डीईआई-एएडीसी के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्थान की प्रार्थना के साथ किया गया, जिसके बाद देश भर से जुड़े शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने एआई आधारित शोध प्रणाली पर मंथन शुरू किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दयालबाग शिक्षण संस्थान के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में एआई तकनीकी के लाभ और चुनौतियों दोनों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध कार्यों में प्रारम्भिक झिझक को दूर करने, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन पहल के अंतर्गत उपलब्ध शोध पत्रों के विश्लेषण, शोध में कमियों के मूल्यांकन तथा डेटा विश्लेषण में बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई द्वारा प्रस्तुत निष्कर्षों को बिना विवेक के स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और शोधार्थियों को परिणामों की स्वतंत्र व्याख्या स्वयं करनी होगी।
कार्यक्रम की संयोजक एवं एआईयू-डीईआई-एएडीसी की नोडल अधिकारी प्रो. ज्योति गोगिया ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान शैक्षणिक एवं शोध परिदृश्य में एआई आधारित कौशलों की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अकादमिक लेखन में एआई उपकरणों का उपयोग करते समय नैतिकता और शैक्षणिक सत्यनिष्ठा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ. पूर्णिमा भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह एफडीपी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा में तकनीकी एकीकरण, नवाचार और शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एफडीपी का उद्देश्य प्रतिभागियों को शैक्षणिक अनुसंधान की सम्पूर्ण प्रक्रिया में एआई की भूमिका के प्रति आधारभूत समझ विकसित कराना तथा शोध के विभिन्न चरणों में एआई उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए दक्ष बनाना है।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में देश भर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और विशेषज्ञ अपने विचार साझा कर रहे हैं। इनमें कर्णावती विश्वविद्यालय गांधीनगर से प्रो. किशोर भानुशाली, आर्यभट्ट कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ. प्रीति जगवानी, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट नोएडा से डॉ. अनुजा शुक्ला, शारदा स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ शारदा यूनिवर्सिटी आगरा से सीए संजीव सिंह ठाकुर, डीईआई के पूर्व छात्र डॉ. ध्रुव भंडारी और श्री शिवि कुलश्रेष्ठ प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त डीईआई के भौतिकी एवं कंप्यूटर विज्ञान विभाग से प्रो. संदीप पॉल, डॉ. लोतिका सिंह और हार्दिक चड्ढा तथा अभियांत्रिकी संकाय के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग से डॉ. के. श्रीनिवास, डॉ. ए. चरण कुमारी, डॉ. वी. प्रेम प्रकाश एवं सुश्री ऋतेश कुमारी विशेषज्ञ वक्ता के रूप में सहभागिता कर रहे हैं।
कार्यक्रम के सत्राध्यक्षों में डॉ. नमिता भाटिया, डॉ. मोगला अचल, डॉ. सोना दीक्षित, डॉ. रेशम चोपड़ा, डॉ. अमला चोपड़ा, डॉ. अपर्णा सत्संगी, डॉ. कविता कुमार और डॉ. पूर्णिमा भटनागर शामिल हैं।
इस राष्ट्रीय स्तर के एफडीपी में हाइब्रिड मोड के माध्यम से 325 प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय में डॉ. आयुषी कुकरेजा, श्री पुष्पेन्द्र कुमार, सुश्री रितिका अग्रवाल, सुश्री सुहाना पांडेय, सुश्री निधि, सुश्री शिवानी उपमन्यु, सुश्री प्रेम सखी और श्री सात्विक शुक्ला का योगदान रहा।