क्या अदावत के बादल छंट रहे? पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव की रामेश्वर यादव के प्रति सिम्पैथी ने एटा की राजनीति में हलचल बढ़ाई, दोनों नेता एक साथ आए तो एटा की राजनीति में बनेंगे नये समीकरण

एटा जनपद की राजनीति में पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव और पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव, जो लंबे समय तक कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे, के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत उभर रहे हैं। रामेश्वर यादव की जमानत पर रिहाई के बाद अवधपाल का उनके प्रति बदला रुख, खासकर भाजपा विधायक पर लगाए गए आरोप और मुख्यमंत्री को भेजा गया शिकायती पत्र, इसे अवधपाल की ओर से रिश्ते सुधारने की दिशा में बढ़ाये गये कदम के रूप में देखा जा रहा है। अलीगंज क्षेत्र में दोनों नेताओं की पुरानी अदावत और चुनावी टकराव के बावजूद हालिया घटनाक्रम संभावित राजनीतिक पुनर्संयोजन की ओर इशारा करता है, जो आने वाले चुनावों में एटा और आसपास की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

Feb 27, 2026 - 12:40
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क्या अदावत के बादल छंट रहे? पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव की रामेश्वर यादव के प्रति सिम्पैथी ने एटा की राजनीति में हलचल बढ़ाई, दोनों नेता एक साथ आए तो एटा की राजनीति में बनेंगे नये समीकरण
एटा के ग्राम टपुआ में एक आयोजन के दौरान एक साथ मौजूद पूर्व मंत्री अवध पाल सिंह यादव और पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव।

-संजीव चौहान-

एटा। जनपद की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा घटनाक्रम चर्चा में है, जो आने वाले समय में जिले के राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकता है। कभी एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी रहे पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव और पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि बदले हुए राजनीतिक हालात और साझा विरोधियों की पृष्ठभूमि में उभरता दिखाई दे रहा है।

लगभग साढ़े तीन वर्षों तक जेल में रहने के बाद रामेश्वर सिंह यादव अक्टूबर 2025 में जमानत पर रिहा हुए थे। रिहाई के बाद जिस तरह से अवधपाल सिंह यादव का रुख उनके प्रति नरम हुआ है, उसे राजनीतिक हलकों में केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह वही अवधपाल हैं, जिनकी रामेश्वर से दशकों तक सीधी राजनीतिक टक्कर रही। हाल ही में एक ऐसा मौका भी आया जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी एक साथ नजर आए ते। मौका था गांव टपुआ में पूर्व विधायक चंद्र प्रताप सिंह (चंदू भैया) की चौथी पुण्यतिथि पर उनकी मूर्ति के अनावरण का। दोनों नेता इसमें पहुंचे और इसी मौके पर अवध पाल सिंह यादव ने रामेश्वर यादव का पक्ष लेते हुए अलीगंज के विधायक पर दोषारोपण किया।

बदले रुख का सबसे स्पष्ट संकेत तब मिला, जब अवधपाल सिंह यादव ने अलीगंज से भाजपा विधायक सत्यपाल सिंह राठौर पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि जिस महिला की शिकायत के आधार पर पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था, उसे वर्तमान भाजपा विधायक का संरक्षण प्राप्त है। यह आरोप केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सीधे सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश और रामेश्वर सिंह के प्रति सहानुभूति के रूप में देखा जा रहा है। अवधपाल ने यह स्टैंड तब लिया जबकि वे स्वयं भी इस समय भाजपा से जुड़े हुए हैं जबकि रामेश्वर यादव का जुड़ाव समाजवादी पार्टी से है।

अवधपाल सिंह यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया शिकायती पत्र इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक बिंदु माना जा रहा है। इस पत्र के जरिए अवधपाल सिंह यादव ने न केवल रामेश्वर यादव के लिए न्याय की मांग उठाई है बल्कि इसके जरिए उन्होंने यह संकेत भी साफ तौर पर दे दिया है कि अवधपाल अब रामेश्वर सिंह यादव के मामले में खुलकर सामने आ चुके हैं। विश्लेषकों के अनुसार, अवध पाल का यह कदम रामेश्वर यादव के समर्थन में एक सार्वजनिक और राजनीतिक स्टैंड है।

अवधपाल यादव और रामेश्वर यादव के बीच की अदावत कोई नई नहीं है। दोनों का राजनीतिक क्षेत्र एक ही है। वह है एटा जिले का अलीगंज विधान सभा क्षेत्र। 2007 के विधानसभा चुनाव में अवधपाल यादव ने रामेश्वर यादव को हराया था और मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। 2012 के चुनाव में रामेश्वर यादव ने पलटवार करते हुए अलीगंज सीट से जीत दर्ज की। दोनों नेताओं का टकराव केवल चुनावी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय वर्चस्व और यादव राजनीति के नेतृत्व से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं का एक ही मंच या एक ही लाइन में आना, राजनीतिक असाधारणता मानी जा रही है।

फिलहाल रामेश्वर सिंह यादव जमानत पर बाहर हैं। हालांकि उन पर और उनके भाई जुगेंद्र सिंह यादव पर गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। दूसरी ओर, बसपा शासन में कद्दावर मंत्री रहे अवधपाल सिंह यादव अब भाजपा विधायक के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम एटा खासकर अलीगंज क्षेत्र में भाजपा बनाम क्षेत्रीय यादव नेतृत्व की नई धुरी तैयार कर सकता है। आने वाले पंचायत, विधानसभा या लोकसभा चुनावों से पहले यदि यह मेल-मिलाप ठोस रूप लेता है, तो इसका असर केवल एटा ही नहीं, बल्कि आसपास की सीटों पर भी दिखाई दे सकता है।

यह घटनाक्रम फिलहाल एक रणनीतिक समीपता जैसा प्रतीत होता है, न कि पूर्ण राजनीतिक गठबंधन। लेकिन राजनीति में स्थायी दोस्त और दुश्मन न होने की कहावत को देखते हुए, एटा की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय का संकेतक जरूर माना जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor