आशा भोसले के झुमका गिरा रे,,,गीत ने बरेली को दिलाई झुमका सिटी के रूप में पहचान
-आरके सिंह- बरेली। सुर साम्राज्ञी आशा भोसले की मधुर आवाज में गाया गया अमर गीत झुमका गिरा रे.... आज भी बरेली की पहचान को देशभर में अलग मुकाम दिलाता है। वर्ष 1966 में रिलीज हुई फिल्म मेरा साया के इस गीत ने न केवल संगीत प्रेमियों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि बरेली को ‘झुमका सिटी’ के रूप में स्थायी पहचान भी दिला दी।
गीत बना शहर की पहचान
इस गीत को महान संगीतकार मदन मोहन ने संगीतबद्ध किया था, जबकि इसे अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया था। दशकों बाद भी इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है, हर पीढ़ी इसे उसी उत्साह और प्रेम से गुनगुनाती है।
‘झुमका’ बना सांस्कृतिक प्रतीक
बरेली प्रशासन ने भी इस पहचान को संजोते हुए शहर में विशाल ‘झुमका’ स्थापित किया, जो आज प्रमुख पर्यटन आकर्षण बन चुका है। यह गीत अब केवल एक फिल्मी रचना नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन चुका है।
भावनात्मक जुड़ाव और श्रद्धांजलि
बरेली कॉलेज की उप-प्राचार्य डॉ. वंदना शर्मा के अनुसार, आशा भोसले का योगदान शहर के लिए इतना गहरा है कि उनके निधन की खबर को लोग व्यक्तिगत क्षति की तरह महसूस करते हैं। उनकी आवाज ने बरेली को जो पहचान दी, वह आने वाली पीढ़ियों तक अमर रहेगी।
सहसवान घराने से जुड़ा गौरव
रोहिलखंड के उद्योगपति रजत शर्मा बताते हैं कि सहसवान घराने की समृद्ध परंपरा ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई है। इस परंपरा के महान संगीताचार्य उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है।
उनकी शिष्य परंपरा में आशा भोसले का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने उस्ताद से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं, जिसने उनकी गायकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उस्ताद को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था।
गौरव की विरासत आज भी जीवंत
ॐ सत्वा चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन संजीव पांडे के अनुसार, भले ही आशा भोसले का बदायूं आगमन नहीं हुआ, लेकिन सहसवान घराने से उनका जुड़ाव पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उस्ताद के अन्य प्रमुख शिष्यों में सोनू निगम, ए आर रहमान और हरिहरन जैसे दिग्गज शामिल हैं।