बगलिहार बांध एक साल बाद भी बंद, दुनिया भर में गिड़गिड़ा रहा है पाकिस्तान, भारत अपने रुख पर अडिग
भारत को पश्चिमी नदियों पर रन ऑफ-द रिवर परियोजनाओं के माध्यम से जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार है। बीते साल से भारत ने इसका इस्तेमाल शुरू किया है।
इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर के रामबन स्थित बगलिहार बांध से पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी बंद है। इसे बीते साल पहलगाम में आतंकी हमले के बाद रोका गया था। चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध की पनबिजली उत्पादन और जल प्रबंधन में अहम भूमिका है। सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद से इन गेटों को बंद हुए एक साल से ज्यादा हो गया है। पाकिस्तान इससे पूरी तरह बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान बार-बार सिंधु संधि और चिनाब के प्रोजेक्ट पर अपना एतराज दिखा रहा है। हालांकि भारत का इस मुद्दे पर रुख अडिग है और उसने फिलहाल कोई छूट देने का इरादा नहीं दिखाया है।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच नदी के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था। संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने बगलिहार बांध के गेटों का लगातार बंद रखा है। इसने पाकिस्तान की चिंता को बढ़ा रखा है क्योंकि पाकिस्तान को सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में पानी भारत से जाने वाली नदियों से मिलता है।
सिंधु नदी प्रणाली में सिंधु नदी, झेलम नदी, चिनाब नदी, रावी नदी, ब्यास नदी और सतलुज नदी शामिल हैं। इस नदी बेसिन का ज्यादातर हिस्सा भारत और पाकिस्तान के बीच बंटा हुआ है। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत तीन पूर्वी नदियों- रावी, सतलुज और ब्यास का पानी (औसतन 33 मिलियन एकड़ फीट) भारत को उसके विशेष इस्तेमाल के लिए दिया गया।
पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को दी गईं, जिनमें औसत 135 MAF पानी बहता है। संधि में तय शर्तों के अनुसार, भारत को इन नदियों के पानी का घरेलू, गैर-खपत वाले और खेती से जुड़े कामों के लिए सीमित इस्तेमाल का अधिकार मिला है। भारत को पश्चिमी नदियों पर 'रन-ऑफ़-द-रिवर' (RoR) परियोजनाओं के जरिए पनबिजली बनाने का अधिकार है। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं।
भारत ने अपने हिस्से में आए पूर्वी नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित की हैं। इनमें सतलुज नदी पर भाखड़ा बांध, ब्यास नदी पर पोंग बाँध और पंडोह बांध और रावी नदी पर रणजीत सागर बांध शामिल है। इनके साथ-साथ ब्यास-सतलुज लिंक, माधोपुर-ब्यास लिंक और इंदिरा गांधी नहर परियोजना से भारत को पूर्वी नदियों के पानी का इस्तेमाल करने में मदद मिली है।
पाकिस्तान की ओर से बार-बार सिंधु जल संधि के मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत का एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि को नहीं रोक सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि पानी के रोकने को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने चिनाब नदी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव पर चिंता जताते हुए भारत को पत्र भी लिखे हैं।