आगरा में सिकंदरा रजवाह और संरक्षित वन उजाड़ने का मामला एनजीटी पहुंचा, यूपी सरकार समेत 12 प्रतिवादियों को नोटिस

आगरा। आगरा कैनाल की सिकंदरा राजवाह, मघटई माइनर और सिकंदरा राजवाह-टर्मिनल रजवाह के संरक्षित वन क्षेत्रों को कथित तौर पर नष्ट करने का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। मामले में सुनवाई करते हुए एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव सहित संबंधित विभागों के 12 प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह की ओर से दायर मूल आवेदन संख्या 570/2026 में नहरों और संरक्षित वन क्षेत्रों पर अतिक्रमण, सड़क निर्माण तथा उनके मूल स्वरूप को बहाल करने की मांग उठाई गई है। मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी को होगी।

Oct 12, 2026 - 19:31
Oct 12, 2026 - 21:38
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आगरा में सिकंदरा रजवाह और संरक्षित वन उजाड़ने का मामला एनजीटी पहुंचा, यूपी सरकार समेत 12 प्रतिवादियों को नोटिस
सिकंदरा रजवाह का जऊपुरा गांव का एक चित्र।

आवेदक स्वयं अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह हैं, ने एनजीटी को बताया कि आगरा में तेजी से हुए शहरीकरण के कारण सिकंदरा रजवाह और उससे जुड़े संरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने अपने पक्ष में वर्ष 1905 और 1965 के आगरा गजेटियर का हवाला देते हुए कहा कि इनमें सिकंदरा रजवाह का उल्लेख मिलता है। आरोप है कि सिकंदरा साइट-सी के पास लखनपुर गांव में रजवाह को नष्ट कर सड़क बना दी गई। साइट-सी से भगवान टॉकीज तक नहर और उसके संरक्षित वन क्षेत्र को भी कथित तौर पर खत्म कर अतिक्रमण किया गया है।

अधिवक्ता के अनुसार, भगवान टॉकीज से सिकंदरा रजवाह सुल्तानगंज की पुलिया और लंगड़े की चौकी की दिशा से होते हुए वाटरवर्क्स के पीछे यमुना नदी में नाले के रूप में गिरती है। उनका दावा है कि सिकंदरा रजवाह के साथ टर्मिनल रजवाह के संरक्षित वन को भी नुकसान पहुंचाया गया है।

टर्मिनल रजवाह के संरक्षित वन पर सड़क निर्माण का आरोप

आवेदन में टर्मिनल रजवाह, जिसे रोहता नहर के नाम से भी जाना जाता है, के संरक्षित वन क्षेत्र पर सड़क निर्माण किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदक ने नहरों और वन क्षेत्रों के संरक्षण तथा उनके मूल स्वरूप की पुनर्स्थापना की जरूरत पर जोर दिया है। मघटई माइनर की पुनर्स्थापना और संरक्षण का मुद्दा भी याचिका में शामिल है।

अपने दावों के समर्थन में अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने एनजीटी के समक्ष विभिन्न सरकारी दस्तावेज, जीपीएस लोकेशन वाली तस्वीरें और सैटेलाइट तस्वीरें प्रस्तुत कीं। इन साक्ष्यों के आधार पर नहरों के पुराने स्वरूप, उनके मार्ग और संरक्षित वन क्षेत्रों में हुए कथित बदलावों का मामला उठाया गया है।

एनजीटी की पीठ ने सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि, नोटिस जारी होना आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

इन विभागों और अधिकारियों को नोटिस

मामले में उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से मुख्य सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग; प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग; प्रमुख सचिव, सिंचाई विभाग; प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग; प्रमुख सचिव, ग्रामीण विकास विभाग; जिलाधिकारी आगरा; उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और आगरा के क्षेत्रीय अधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है।

अन्य प्रतिवादियों में नगर निगम आगरा के सिटी कमिश्नर, आगरा विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के चेयरमैन शामिल हैं। एनजीटी ने इन सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी को निर्धारित की गई है।

SP_Singh AURGURU Editor