एयरफोर्स अफसर बनकर साइबर ठगों ने आगरा की फर्म से 5.24 लाख ठगे, फर्जी गेट पास के नाम पर लगाया चूना

आगरा में साइबर ठगों ने खुद को खेरिया एयरफोर्स स्टेशन का अधिकारी बताकर “टेकसैल्यूट इनकॉरपोरेशन” फर्म से 5.24 लाख रुपये की ठगी कर ली। फर्जी परचेज ऑर्डर भेजकर सिलिकोन सीलेंट मटेरियल मंगाया गया और बाद में गेट पास व अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर 11 ट्रांजैक्शन में रकम ट्रांसफर करा ली गई। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना आगरा में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

May 29, 2026 - 19:29
 0
एयरफोर्स अफसर बनकर साइबर ठगों ने आगरा की फर्म से 5.24 लाख ठगे, फर्जी गेट पास के नाम पर लगाया चूना

खेरिया एयरफोर्स स्टेशन में डिलीवरी दिलाने का दिया झांसा, 11 ट्रांजैक्शन में खाते खाली कराए

आगरा। आगरा में साइबर ठगों ने भारतीय वायुसेना के नाम का इस्तेमाल कर एक प्रतिष्ठित फर्म को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। जालसाजों ने खुद को खेरिया एयरफोर्स स्टेशन का सीनियर अकाउंट ऑफिसर बताकर बेहद शातिर तरीके से पूरा जाल बुना और फर्जी गेट पास व अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर पांच लाख चौबीस हजार तीन सौ चौरासी रुपये हड़प लिए। मामले में साइबर क्राइम थाना, आगरा में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

शाहगंज क्षेत्र के केदार नगर निवासी पुनीत उप्रेती ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता के नाम से “टेकसैल्यूट इनकॉरपोरेशन” नाम की फर्म संचालित होती है। कुछ दिन पहले उनकी फर्म को एक परचेज ऑर्डर प्राप्त हुआ। यह ऑर्डर कथित तौर पर खेरिया एयरफोर्स स्टेशन के सीनियर अकाउंट ऑफिसर मेजर कुलदीप सिंह की ओर से भेजा गया था। ऑर्डर में सिलिकोन सीलेंट मटेरियल की सप्लाई मांगी गई थी।

एयरफोर्स स्टेशन से ऑर्डर मिलने पर फर्म को किसी तरह का शक नहीं हुआ। पीड़ित पक्ष ने तय समय में मटेरियल तैयार कराया, उसका बिल बनाया और माल को डिलीवरी के लिए खेरिया एयरफोर्स स्टेशन भेज दिया। लेकिन यहीं से ठगों का असली खेल शुरू हुआ।पीड़ित जब माल लेकर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा तो कथित मेजर कुलदीप सिंह ने फोन पर उसे गेट के बाहर ही रुकवा दिया। 

इसके बाद उसने कहा कि डिफेंस क्षेत्र में डिलीवरी की प्रक्रिया सामान्य संस्थानों से अलग होती है। माल को अंदर ले जाने और गेट एंट्री पास जारी करने के लिए पहले कमांडिंग ऑफिसर के खाते में बिल की रकम जमा करनी होगी। भरोसा दिलाया गया कि अकाउंट वेरिफिकेशन होते ही पूरी राशि तत्काल वापस कर दी जाएगी और माल की एंट्री भी हो जाएगी।

सरकारी प्रक्रिया और एयरफोर्स का नाम सुनकर पीड़ित पूरी तरह झांसे में आ गया। ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेजी और रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित ने अपने निजी कोटक महिंद्रा बैंक खाते और फर्म के करंट अकाउंट से कुल 11 ट्रांजैक्शन के जरिए पांच लाख चौबीस हजार तीन सौ चौरासी रुपये ट्रांसफर कर दिए।

रकम भेजने के बाद जब काफी देर तक न तो गेट पास मिला और न ही माल अंदर जाने दिया गया, तब पीड़ित को शक हुआ। उसने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कथित अधिकारी का फोन बंद हो गया। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।

मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस थाना, आगरा में दर्ज कराई गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस ठगी को अंजाम देने में किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग अब सरकारी संस्थानों, सेना और बड़े विभागों के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों और सप्लायरों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में बिना सत्यापन किसी भी खाते में रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।