जनकपुरी के मंच पर उतरी त्रेतायुग की दिव्यता, अग्नि प्रभावों और उड़ते राक्षसों ने दर्शकों को किया रोमांचित

आगरा के भावना एस्टेट में जनकपुरी महोत्सव के अंतर्गत लाडी संगीत मेकर की ओर से रामायण पर आधारित नाटक ‘रघुवंशी रघुनंदन’ का भव्य मंचन किया गया। करीब डेढ़ घंटे की प्रस्तुति में आधुनिक तकनीक, लाइट-साउंड, आतिशबाजी और विशेष प्रभावों के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया गया। गौरव खन्ना ने श्रीराम, बिंदु दारा सिंह ने हनुमान और आर्यन बब्बर ने रावण की भूमिका निभाई। उड़ते राक्षसों, लंका दहन और श्रीराम-माता जानकी के विवाह के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन समिति ने महोत्सव की सफलता में सहयोग देने वाले सदस्यों और महिला समिति का आभार जताया।

Oct 10, 2026 - 22:13
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जनकपुरी के मंच पर उतरी त्रेतायुग की दिव्यता, अग्नि प्रभावों और उड़ते राक्षसों ने दर्शकों को किया रोमांचित
जनकपुरी के मंच पर आयोजन समिति के पदाधिकारी व सदस्य।

गौरव खन्ना बने प्रभु श्रीराम, बिंदु दारा सिंह ने निभाया हनुमान का किरदार; आर्यन बब्बर के रावण रूप और भव्य तकनीकी इफेक्ट्स ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

आगरा। हवा में उड़ते राक्षस, चारों ओर प्रज्वलित अग्नि की लपटें, प्रकाश की चकाचौंध और युद्ध के दृश्यों के बीच गूंजते प्रभावशाली संवाद… जनकपुरी महोत्सव के अंतर्गत भावना एस्टेट में शनिवार की शाम रामायण के सजीव चित्रण ने दर्शकों को अचंभित कर दिया। मंच पर जब उड़ते हुए राक्षस दिखाई दिए और प्रज्वलित अग्नि के विशेष इफेक्ट्स के बीच रामकथा के प्रसंग साकार हुए, तो दर्शक देर तक पलकें झपकाना भूल गए। आधुनिक तकनीक, आतिशबाजी, लाइट-साउंड और कलाकारों के दमदार अभिनय से सजी डेढ़ घंटे की नाट्य प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक अंत तक मंत्रमुग्ध होकर देखते रहे।

जनकपुरी महोत्सव में मां जानकी की विदाई के बाद भी मिथिला की धरती पर रामायण की स्मृतियां जीवंत रहीं। लाडी संगीत मेकर की ओर से रामकथा पर आधारित ‘रघुवंशी रघुनंदन’ नाटक का भव्य मंचन किया गया। जनकपुरी के मंच पर पहली बार इस स्तर की तकनीकी भव्यता के साथ हुई प्रस्तुति ने महोत्सव की सांस्कृतिक गरिमा में नया अध्याय जोड़ दिया। मंच पर साकार होते दृश्य केवल नाटक का हिस्सा नहीं लग रहे थे, बल्कि मानो दर्शकों के सामने रामायण का एक-एक प्रसंग घटित हो रहा हो।

आसमान में उड़ते राक्षस और अग्नि के बीच युद्ध के दृश्य

नाटक का सबसे रोमांचक पक्ष इसके तकनीकी प्रभाव रहे। आसमान में उड़ते राक्षसों के दृश्यों ने दर्शकों को विस्मित किया तो प्रज्वलित अग्नि के प्रकाश प्रभावों ने युद्ध के प्रसंगों में रोमांच भर दिया। रंग-बिरंगी रोशनी, प्रभावशाली ध्वनि, पार्श्व संगीत और मंच पर तेजी से बदलते दृश्य मिलकर ऐसा वातावरण रच रहे थे, मानो अयोध्या और रामायण का युग सामने उतर आया हो।
कभी भव्य राजमहलों की झलक, कभी युद्धभूमि का रोमांच और कभी प्रभु श्रीराम के आदर्शों को उजागर करते भावपूर्ण प्रसंग—हर दृश्य दर्शकों को कथा के साथ बांधे रहा। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल चमत्कार दिखाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने कथा के भाव, पात्रों के संघर्ष और रामायण की दिव्यता को और प्रभावशाली बना दिया। मंच पर लंका दहन प्रसंग में अग्नि की लपटों और प्रकाश के संयोजन के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनाए रखी।

गौरव खन्ना बने श्रीराम, बिंदु दारा सिंह ने निभाया हनुमान का पात्र

बॉलीवुड कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रमुख पात्रों को सजीव कर दिया। प्रभु श्रीराम की भूमिका में गौरव खन्ना ने मर्यादा, धैर्य और शौर्य का प्रभावशाली चित्रण किया। लक्ष्मण के रूप में राजन मोदी ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा। मां सीता की भूमिका में प्राची ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। बिंदु दारा सिंह ने हनुमान के रूप में शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रभाव छोड़ा। आर्यन बब्बर ने रावण के पात्र में अपनी दमदार संवाद अदायगी, प्रभावशाली हाव-भाव और ओजस्वी व्यक्तित्व से उसकी विकरालता, अहंकार और पराक्रम को सजीव कर दिया। उनके रौद्र रूप और प्रभावशाली मंचीय उपस्थिति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कलाकारों के संवाद, हाव-भाव और मंच पर उनकी ऊर्जा ने रामायण के पात्रों को जीवंत बना दिया। संगीत और प्रकाश के साथ सधे हुए अभिनय ने प्रत्येक दृश्य को नया आयाम दिया। डेढ़ घंटे तक चले इस मंचन में दर्शकों की निगाहें मंच पर टिकी रहीं। हर नया दृश्य उत्सुकता बढ़ाता रहा और तकनीकी प्रभावों ने प्रस्तुति को भव्यता प्रदान की। सबसे भव्य दृश्य प्रभु श्री राम और माता जानकी के विवाह का था। मंच दीपको का प्रकाश अलौकिकता प्रदान कर रहा था।

जनकदुलारी की विदाई के बाद भी जीवंत रहीं रामायण की स्मृतियां

जनकपुरी महोत्सव में मां जानकी की विदाई भावुक क्षणों के साथ संपन्न हुई थी, लेकिन ‘रघुवंशी रघुनंदन’ के मंचन ने मिथिला के वातावरण को फिर राममय कर दिया। विवाहोत्सव की स्मृतियों के बीच रामायण के व्यापक स्वरूप को मंच पर प्रस्तुत कर कलाकारों ने दर्शकों को भक्ति, त्याग, मर्यादा और धर्म के संदेश से जोड़ा। भावना एस्टेट में सजी मिथिला की पृष्ठभूमि इस प्रस्तुति के लिए विशेष आकर्षण बनी।

आयोजन समिति और महिला समिति का आभार

जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव ने भव्य आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सदस्यों, सहयोगियों और महिला समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव की भव्यता सभी के सामूहिक परिश्रम, समर्पण और सनातन संस्कृति के प्रति श्रद्धा का परिणाम है। उन्होंने राजा दशरथ संजय सिंघल और रानी कौशल्या सहित राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल का अभिनन्दन किया। 

इस अवसर पर संतोष कटारा, मनोज बंसल, संजय गोयल, अजय अवागढ़, नरेंद्र सिंह सेंगर, अशोक गुप्ता, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानियां, मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह, अरविंद शर्मा, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, अविनाश राणा, रामवली यादव, जनकपुरी महोत्सव महिला समिति की अध्यक्ष अमृता पोरवाल, शिखा, रुचि, सीमा, शालिनी, सिमी, शीतल,  शुचि, वंदना, संगीता, मीना, मिशी, दीप्ति, ऋतु, प्रियंका ठाकुर, शीतल, एकता, ज्योति, शालू, रुपाली, संगीता, रिंकू सहित सभी सहयोगियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।