जाट आरक्षण का श्रेय सादाबाद की रैली को देकर आगरा की जाट सरदारी का अपमान न करें, कुंवर शैलराज सिंह बोले- सभी जानते हैं कि आगरा के जाट समाज के ज्ञापन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने समाज को आरक्षण दिया था

आगरा। विगत दिवस आयोजित अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस कार्यक्रम में जाट आरक्षण को लेकर किये गये एक दावे पर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कुंवर शैलराज सिंह ने मंच से मुख्य वक्ता के उस कथन पर कड़ा एतराज जताया है, जिसमें उत्तर प्रदेश में जाटों को आरक्षण मिलने का श्रेय हाथरस के सादाबाद की रैली को दिया है। यह न केवल तथ्यहीन है, बल्कि जाट आरक्षण के लिए आगरा के जाट समाज के संघर्ष का अपमान भी है।

Apr 14, 2026 - 18:34
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जाट आरक्षण का श्रेय सादाबाद की रैली को देकर आगरा की जाट सरदारी का अपमान न करें, कुंवर शैलराज सिंह बोले- सभी जानते हैं कि आगरा के जाट समाज के ज्ञापन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने समाज को आरक्षण दिया था

कुंवर शैलराज सिंह एडवोकेट ने एक बयान में कहा है कि विगत दिवस जाट समाज के एक संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को वे फेसबुक पर लाइव देख और सुन रहे थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता द्वारा यह दावा किया गया कि वर्ष 2000 में हाथरस जनपद के सादाबाद में आयोजित रैली के कारण जाट समाज को उत्तर प्रदेश में आरक्षण मिला। कुंवर शैलराज सिंह ने इसे नितांत असत्य और भ्रामक बताया है।

एडवोकेट शैलराज सिंह ने स्पष्ट किया है कि जाट आरक्षण की वास्तविक नींव आगरा में रखी गई थी, जब 31 दिसंबर 1999 को जाट आरक्षण संघर्ष समिति, आगरा, जिसके वे तत्कालीन संयोजक थे, के द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता को आगरा में ज्ञापन सौंपा गया था। इसी ज्ञापन के आधार पर राज्य सरकार ने कैबिनेट में निर्णय लिया और बाद में इसे लागू किया गया।

शैलराज सिंह के अनुसार, यह ऐतिहासिक तथ्य सरकारी अभिलेखों में दर्ज है और स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में इसका उल्लेख किया था। ऐसे में सादाबाद रैली को इसका श्रेय देना न केवल गलत है, बल्कि यह आगरा के जाट समाज के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि आगरा जनपद का जाट समाज लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहा है और आरक्षण की लड़ाई में उसकी भूमिका निर्णायक रही है। इसके विपरीत, उस समय हाथरस, अलीगढ़, मथुरा और बुलंदशहर जैसे जनपदों में कोई बड़ा आंदोलन या संघर्ष सामने नहीं आया था।

शैलराज सिंह ने इस पूरे प्रकरण को आगरा की जाट सरदारी का अपमान बताते हुए इस दावे की कड़ी निंदा की और कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना समाज को गुमराह करने के समान है। उन्होंने कि तथ्यात्मक सच्चाई को ही आधार बनाया जाए, ताकि नई पीढ़ी को सही इतिहास मिल सके। 

ज्ञातव्य है कि कुंवर शैलराज सिंह ने 13 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस मनाने पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उनका कहना था कि 13 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस के रूप में प्रस्तुत करना ऐतिहासिक तथ्यों के साथ न्याय नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2015 में इस दिवस की अवधारणा एक विदेशी विश्वविद्यालय से जुड़ी बताई जाती है, जबकि वास्तविकता में यह दिन देश के इतिहास में किसानों के शहीदी दिवस के रूप में दर्ज है।

उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड में सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को गोलियों से भून दिया गया था। यह दिन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का है, न कि किसी अन्य रूप में प्रस्तुत करने का। ऐसे में इस ऐतिहासिक दिन की मूल भावना से छेड़छाड़ करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

SP_Singh AURGURU Editor