बीत रहे भावुक पल, कभी अलविदा न कहना, हरीश राणा को कलेजे पर पत्थर रखकर दी जा रही अंतिम विदाई
13 साल से कोमा में रह रहे हरीश राणा का ऐम्स में पैसिव इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। माता-पिता कलेजे पर पत्थर रखकर अपने चिराग को अंतिम विदाई देने के इंतजार में हैं। ऐसे में उनका अंगदान भी किया जा सकता है।
नई दिल्ली। हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पूरी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इसमें 15 से 30 दिन का वक्त लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट से पैसिव इच्छामृत्यु की मंजूरी दिए जाने के बाद से एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में यह प्रक्रिया पूरी होगी। हरीश राणा के परिजन भरे मन से कलेजे पर पत्थर रखकर उनकी अंतिम और गरिमामय विदाई का इंतजार कर रहे हैं। परिजन चाहते हैं कि इस दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी हरीश कुछ लोगों में जिंदा रहें। उनके परिजन हरीश राणा के अंगदान की तैयारी में हैं।
संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में पड़ोसियों के हवाले से कहा गया है कि हरीश राणा के अंगदान के बारे में कुछ समय पहले ही उनके परिजनों ने फैसला ले लिया था। करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने राजनगर एक्सटेंशन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव मेंबर दीपांशु मित्तल से इस बारे में बात भी की थी, जो अंगदान से जुड़ी संस्था दधीचि देहदान समिति से जुड़े हैं।
उस वक्त उन्होंने पूछा था कि क्या उनके बेटे का देहदान या अंगदान संभव हो सकता है। तब उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों की एक टीम यह तय करती है कि क्या अंगदान संभव हो सकता है। यह मरीज की कंडीशन पर निर्भर करता है।
एक हादसे के बाद बीते 13 साल से कोमा में चल रहे हरीश राणा के अंगदान के लिए एम्स की एक टीम इन संभावनाओं की जांच कर रही है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि हरीश राणा के किडनी, हार्ट, आंतें और पैंक्रियाज जैसे ऑर्गन अंगदान के लिए फिट पाए गए हैं। साथ ही आंखों की कॉर्निया और हार्ट के वॉल्व की भी जांच की जा रही है। परिवार की सहमति से कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार सभी जरूरी मेडिकल जांच के बाद अंगदान की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हजारों मरीज ऑर्गन हासिल करने की लाइन में हैं। खासतौर पर किडनी, लिवर या हार्ट की जरूरत काफी ज्यादा है। गंभीर मामलों में अंगदान किसी की जिंदगी बचा सकता है। यह हरीश राणा को दूसरी जिंदगी देने जैसा होगा।
आंकड़ों के अनुसार, एक अंगदान से 8 से ज्यादा लोगों को जिंदगी का तोहफा दिया जा सकता है। सभी अंग मरने के बाद दान किए जा सकते हैं। एक लिविंग डोनरकिडनी या लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति के मरने के बाद उसके हार्ट, दोनों किडनी, दोनों फेफड़े, लिवर, पैंक्रियाज और छोटी आंत दान किए जा सकते हैं। वहीं, जीवित रहते ही अंगदान के लिए 1 किडनी या लिवर का कुछ हिस्सा दान किया जा सकता है।
अंगदान करने का फैसला किसी व्यक्ति का खुद का हो सकता है। भारत में अगर आप ऑर्गन डोनर बनना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने परिवार को बताना होगा। अंगदान के लिए परिजनों की सहमति जरूरी है।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 लाख से ज्यादा लोग अंग हासिल करने के लिए लाइन में लगे हैं। किसी के मरने के बाद अंगदान करने की दर काफी कम है, जबकि मांग बहुत ज्यादा है। ज्यादातर लोग जो अंगदान करते हैं, वो जीवित होते हैं। खासतौर पर करीब 80 फीसदी ऑर्गन डोनर महिलाएं होती हैं। वहीं, अंग प्राप्त करने वाले 80 फीसदी लोग पुरुष होते हैं।