पट्टी पचगाई बनने की कगार पर खड़ा पूरा फतेहपुर सीकरी क्षेत्र, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में

आगरा। विश्व धरोहर नगरी फतेहपुर सीकरी और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट अब सिर्फ कमी का नहीं, बल्कि ज़हरीले भूजल का संकट बन चुका है। लगातार गिरते जलस्तर के साथ-साथ पानी में अत्यधिक खारापन और फ्लोराइड की खतरनाक मात्रा ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि पूरा इलाका पट्टी पचगाई जैसी त्रासदी की ओर बढ़ता दिख रहा है।

Mar 27, 2026 - 21:41
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पट्टी पचगाई बनने की कगार पर खड़ा पूरा फतेहपुर सीकरी क्षेत्र, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में
फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के भूजल संकट को लेकर प्रेस को बताते श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा। साथ हैं सिविल सोसाइटी आफ आगरा के अनिल शर्मा।

उधर, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट भी इस संकट की गंभीरता की पुष्टि करती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता हालात को और भयावह बना रही है।

भूजल गिरा, ज़हर बढ़ा: दोहरी मार झेल रहा इलाका

फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, वहीं पानी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। खारेपन और फ्लोराइड की अधिकता के कारण न सिर्फ पीने योग्य पानी संकट में है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य और श्रम क्षमता पर पड़ रहा है।

भारत सरकार द्वारा जल संरक्षण और जलस्तर सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं का असर इस क्षेत्र में नगण्य दिखाई दे रहा है।

तेरहमोरी बांध बना ‘मूक दर्शक’, टूटी व्यवस्था से सूखी नदियां

सिंचाई विभाग के अधीन आने वाला तेरहमोरी बांध, जो जनपद का सबसे बड़ा जलस्रोत है, आज बदहाल स्थिति में है। इसके गेट वर्षों से टूटे पड़े हैं, जिसके चलते मानसून का पानी रुक ही नहीं पाता।

इसी के साथ खारी नदी का बहाव भी लगभग समाप्त हो चुका है। कभी यही नदी और बांध क्षेत्र के हैंडपंप, कुओं और खेतों को जीवन देते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बांध की मरम्मत हो जाए और पानी रोका जाए, तो भूजल स्वतः रिचार्ज हो सकता है और पानी की गुणवत्ता में भी सुधार आ सकता है।

रिपोर्ट: समाधान है, लेकिन अमल नहीं

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड द्वारा जारी एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट प्लान (आगरा डिस्ट्रिक्ट) रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि ‘एक्विफर रीचार्ज’ क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की स्थिति चिंताजनक है और इसे सुधारने के लिए प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। लेकिन सवाल यह है कि जब समाधान उपलब्ध है, तो फिर कार्य योजना क्यों नहीं बनाई जा रही?

पट्टी पचगाई जैसी त्रासदी का खतरा

किरावली तहसील के कई गांवों में हालात तेजी से ‘पचगाई पट्टी’ जैसे बनते जा रहे हैं, जहां खराब पानी के कारण बड़ी संख्या में लोग शारीरिक विकलांगता का शिकार हो चुके हैं।

श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो फतेहपुर सीकरी की मेहनतकश आबादी भी इसी त्रासदी का शिकार हो सकती है। उन्होंने बताया कि खराब स्वास्थ्य के कारण यहां के मजदूरों को रोजगार मिलने में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। पहले यहां के श्रमिक पत्थर खदानों और चक्की निर्माण कार्यों में लगे रहते थे, लेकिन पिछले एक दशक से ये काम बंद हैं।

अब मजदूरों को आगरा या भरतपुर जाना पड़ता है, लेकिन जैसे ही उनके पहचान पत्र से फतेहपुर सीकरी का नाम सामने आता है, काम देने वालों का रवैया बदल जाता है। यह स्थिति सामाजिक और आर्थिक भेदभाव की भयावह तस्वीर पेश करती है।

संगठन की चेतावनी: अब भी नहीं जागे तो देर हो जाएगी

उप्र ग्रामीण मजदूर संगठन के नेता तुलाराम शर्मा ने श्रम, स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग को कई बार पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता बताई है।

उन्होंने मांग की है कि श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएं। तेरहमोरी बांध के गेटों की तत्काल मरम्मत हो । भूजल रिचार्ज योजना लागू की जाए।

SP_Singh AURGURU Editor