पोखरण में एक्सरसाइज, वायुशक्ति के जरिए एयरफोर्स ने दिखाई ताकत, ऑपरेशन सिंदूर की गाथा भी सुनाई
राजस्थान के पोखरण में इंडियन एयरफोर्स ने ‘एक्सरसाइज वायुशक्ति’ के जरिए अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत स्ट्राइक, मिसाइल और लोइटरिंग एम्युनिशन की सटीकता दिखाई गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी। राफेल, सुखोई, मिराज, जगुआर और अन्य प्लेटफॉर्म्स ने युद्धक क्षमता और समन्वय का प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली। इंडियन एयरफोर्स ने राजस्थान के पोखरण रेंज में ‘ एक्सरसाइज वायुशक्ति ’ के जरिए अपनी क्षमता दिखाई साथ ही ये भी दिखाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किस तरह पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों पर स्ट्राइक से लेकर रनवे, रडार तक को नष्ट किया गया था। मिसाइल से लेकर लॉइटरिंग एम्युनिशन ने किस तरह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सटीक निशाना लगाया था, ये भी एक्सरसाइज के जरिए दिखाया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एयरफोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की मौजूदगी में यह एक्सरसाइज की गई।
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एयरफोर्स स्टेशन पर स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी। इससे पहले वह साल 2023 में सुखोई-30 एमकेआई और 2025 में राफेल लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। यह मिशन दो हेलीकॉप्टरों के गठन में पूरा किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ लीड हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी, एयफोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र दूसरे हेलीकॉप्टर में नंबर-2 के रूप में शामिल रहे।
करीब 25 मिनट की इस उड़ान के दौरान उन्होंने गड़ीसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक क लक्ष्य पर हमला किया। विज़िटर बुक में राष्ट्रपति ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि “भारत में विकसित स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा। इस उड़ान ने देश की रक्षा क्षमताओं पर मेरा गर्व और बढ़ा दिया है।”
एयरफोर्स के इस फायर पावर प्रदर्शन में दिखाया गया कि एयर पावर किस तरह सटीक निशाने, उन्नत सेंसर और सभी फोर्स के बीच बेहतर समन्वय के जरिए युद्ध के मैदान में नतीजे तय करती है। इस एक्सरसाइज ने एयरफोर्स की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता, तेजी से तैनाती और दुश्मन के एयर डिफेंस को तबाह करने की ताकत दिखाई। इसके जरिए एयरफोर्स ने संदेश दिया कि एयरफोर्स भविष्य के किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है। एयरफोर्स के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अभ्यास ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने के साथ ही रणनीति, ट्रेनिंग और तकनीक की प्रभावशीलता को परखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
एक्सरसाइज में अलग अलग फाइटर जेट नेटोही (रिकॉनिसेंस), सटीक हमले (प्रिसिजन स्ट्राइक), दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाने और हवाई बढ़त (एयर सुपीरियोरिटी) जैसे मिशन को अंजाम दिया। राफेल जेट ने सुपरसोनिक रन और एयर डिफेंस इंटरसेप्ट का प्रदर्शन किया। साथ ही विजुअल रेंज से परे (बीवीआर) स्ट्राइक की क्षमता सहित मल्टी-रोल क्षमता दिखाई। Su-30MKI फाइटर जेट ने भारी पारंपरिक बमों का इस्तेमाल करते हुए कमांड-एंड-कंट्रोल ठिकानों पर डीप स्ट्राइक का अभ्यास किया।
मिराज- 2000 लड़ाकू विमानों ने 450 किलोग्राम बमों के साथ सटीक बमबारी की क्षमता का प्रदर्शन किया। जगुवार ने टोही क्षमता दिखाई। साथ ही कॉम्बेट हेलिकॉप्टर्स ने बेटल फील्ड सपोर्ट मिशन का प्रदर्शन किया। ALH Mk-IV रुद्र हेलिकॉप्टर्स ने दुश्मन की बख्तरबंद वाहनों की काल्पनिक टुकड़ियों पर रॉकेट हमले किए। एलसीएच प्रचंड ने दुश्मन के फॉरवर्ड आर्मिंग और रीफ्यूलिंग प्वाइंट्स पर स्ट्राइक की। इन मिशनों ने दिखाया कि विवादित हवाई क्षेत्र (कॉन्टेस्टेड एयरस्पेस) में अटैक हेलिकॉप्टर किस तरह ग्राउंड फोर्स को प्रभावी समर्थन दे सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स ने भी अपनी ऑपरेशनल भूमिका का प्रदर्शन किया। भारतीय सेना की एल-70 गन का भी एक्शन एक्सरसाइज में दिखा। ये एयर डिफेंस गन है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई थी। चिनूक हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर से M-777 को ऑपरेशन एरिया में पहुंचाकर उनकी तैनाती भी दिखाई गई।