एडीए के खिलाफ किसानों का आर-पार का ऐलान: जमीन वापस करो, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन, बोले- 16 साल बाद भी कब्जा हमारा, फिर क्यों नहीं लौटाई जा रही जमीन

आगरा। एडीए द्वारा इनर रिंग रोड तृतीय चरण के लिए अधिग्रहित जमीनों को वापस दिलाने की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा सोमवार को खुलकर दिखाई दिया। सैकड़ों किसानों ने आयुक्त कार्यालय और एडीए कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की तथा अधिकारियों पर किसानों के साथ धोखा व शोषण करने और प्रदेश सरकार को बदनाम करने के आरोप लगाए। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी जमीनें वापस नहीं की गईं तो अब आर-पार का संघर्ष होगा और किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।

May 19, 2026 - 18:40
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एडीए के खिलाफ किसानों का आर-पार का ऐलान: जमीन वापस करो, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन, बोले- 16 साल बाद भी कब्जा हमारा, फिर क्यों नहीं लौटाई जा रही जमीन
एडीए कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक में मौजूद किसान।

किसानों ने दावा किया कि 24 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि यदि किसानों की जमीन लेनी है तो वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाए और यदि जमीन की आवश्यकता नहीं है तो उसे किसानों को वापस किया जाए। किसानों का प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला था, लेकिन फिर भी जिला प्रशासन और एडीए अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

मंडलायुक्त ने सुनी बात और दिए निर्देश

सोमवार को आयुक्त कार्यालय में आयुक्त, एडीए, एसएलओ और एसडीएम सदर के साथ किसानों की बैठक प्रस्तावित थी। सैकड़ों किसान आयुक्त कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां किसानों को बताया गया कि एडीए सचिव और एसएलओ ने हाल ही में कार्यभार संभाला है, इसलिए उन्हें कुछ समय दिया जाए।

यह सुनते ही किसान भड़क उठे और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने किसानों को दोबारा बुलाया और एडीए सचिव तथा एसएलओ से फोन पर बातचीत कर तत्काल समाधान निकालने के निर्देश दिए।

धारा 22/24 और 33/34 के तहत जमीन वापस करो

इसके बाद किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में सैकड़ों किसान एडीए कार्यालय पहुंचे, जहां करीब एक घंटे तक एडीए सचिव और भूमि अध्याप्ति अधिकारी के साथ वार्ता चली। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा कि कानून की धारा 22/24 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि अधिग्रहित जमीन पर पांच वर्षों तक कोई निर्माण कार्य या विकास कार्य नहीं होता है, तो जमीन वापस करने का अधिकार कानून में मौजूद है।

उन्होंने कहा कि किसान जमीन से संबंधित सभी प्रमाण पहले ही दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद एडीए अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। किसानों ने आरोप लगाया कि एडीए अधिकारियों ने जमीन देने वाले किसानों के अधिकारों का हनन किया और कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं।

भूमिहीन किसानों को भूखंड और नौकरी दो

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने मांग रखी कि भूमिहीन हुए किसानों को 40 वर्गमीटर के भूखंड दिए जाएं तथा पात्रता के आधार पर सरकारी नौकरी भी दी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एडीए अधिकारी किसानों की जमीनों में दलाली कराने के प्रयास में लगे हुए हैं।

आलू विकास समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को हल्के में न लिया जाए, अन्यथा एडीए कार्यालयों की तालाबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि धारा 33 और 34 के तहत यदि अधिग्रहित जमीन निर्धारित कार्य में उपयोग नहीं हो रही है, तो उसे सीधे किसानों को वापस किया जा सकता है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसानों ने दो टूक कहा कि अब एडीए की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। किसानों का कहना था कि 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीन पर भौतिक कब्जा किसानों का ही है, जिससे स्पष्ट है कि अधिग्रहित भूमि का उपयोग नहीं किया गया।

मौके पर किसान नेता श्याम सिंह चाहर, लक्ष्मी नारायण बघेल, प्रमोद कुमार, महावीर चार, रघुनाथ शर्मा, श्री भगवान, विनोद कुमार, आशुतोष महेश्वरी, नागेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह सिनवार, लक्ष्मण सिंह, मुकेश पाठक, लाखन सिंह, वासुदेव कुशवाहा, नरोत्तम शर्मा, बंटू राम, विजय शर्मा, मनोज कुमार, कन्हैया, सोनू, धर्म कुशवाहा, पप्पू सिंह, हर प्रसाद, हरि सिंह, श्रीचंद्र चार, विवेक कुमार, आशुतोष, विनोद, महेश, विशंभर, लखन सिंह, सलीम खान, जावेद खान, अशोक कुमार, नागेंद्र सिंह, वेदों पंडित, सचिन सिकरवार, सत्यवीर सिंह, धर्मेंद्र कुमार, कृष्ण शर्मा, रविंद्र कुमार, हरीश कुमार, रवि कुमार, दया किशन, जगदीश शर्मा, राम सिंह, श्याम सेठ सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor