कंगना रनौत मामले में आगरा के स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में कल होगी निर्णायक बहस

आगरा। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध किसानों के कथित अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में कल स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में दोनों पक्षों की बहस होगी। मामले की सुनवाई को लेकर लंबे समय से कानूनी हलचल बनी हुई है और आज की बहस को बेहद अहम माना जा रहा है।

May 19, 2026 - 17:32
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कंगना रनौत मामले में आगरा के स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में कल होगी निर्णायक बहस

ज्ञात हो कि 3 अप्रैल 2026 को अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 16 अप्रैल 2026 की तिथि नियत की थी, लेकिन उस दिन निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 को आदेश के लिए अगली तिथि तय की थी।

इसी बीच 21 अप्रैल 2026 को विपक्षिया कंगना रनौत की अधिवक्ता अनसूया चौधरी द्वारा बिना नियत तिथि के अदालत में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कराया गया, जिसे उनकी जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान ने दाखिल किया। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि 16 अप्रैल 2026 को अदालत ने वादी पक्ष को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) पर बहस करने की अनुमति दी थी तथा फाइल को मार्क करने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे वादी पक्ष को महत्वपूर्ण लाभ मिला। साथ ही विपक्षया की ओर से 30 अप्रैल 2026 को निर्णय न किए जाने का अनुरोध करते हुए कहा गया कि कुछ अतिरिक्त प्रपत्र अदालत में प्रस्तुत किए जाने हैं।

वादी पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

मामले में वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने 30 अप्रैल 2026 को लिखित जवाब दाखिल करते हुए विपक्षिया द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को न तो आईटी एक्ट पर कोई बहस हुई थी और न ही किसी दस्तावेज को मार्क किया गया था।

वादी पक्ष के अनुसार केवल कुछ महत्वपूर्ण प्रपत्रों पर फ्लैग लगाने की अनुमति अदालत से ली गई थी। यह कार्य अदालत के पेशकार और विपक्षिया की अधिवक्ता सुधा प्रधान की उपस्थिति में किया गया। इतना ही नहीं, सुधा प्रधान के कहने पर वादी पक्ष ने विपक्षिया द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों पर भी फ्लैग लगवाए थे।

अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का मिला अवसर

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने विपक्षिया को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का अवसर प्रदान किया था। इसी कारण 30 अप्रैल 2026 को निर्णय नहीं सुनाया गया और आज की तिथि बहस के लिए नियत की गई।

अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद मामले में आगे की कानूनी दिशा तय कर सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor