गैस संकट से बदली रसोई की तस्वीर—बरेली में फिर जले चूल्हे, अंगीठी और कोयले की भट्टी का दौर लौटा

-रमेश कुमार सिंह- बरेली। शहर में एलपीजी गैस की किल्लत ने आम जनजीवन को गहराई से प्रभावित कर दिया है। रसोई से लेकर होटल और छोटे कारोबार तक इसकी मार साफ दिखाई दे रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग आधुनिक गैस चूल्हों को छोड़कर फिर से मिट्टी के चूल्हे, अंगीठी और कोयले की भट्टी की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। दूसरी ओर प्रशासन भले ही आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।

Mar 19, 2026 - 22:04
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गैस संकट से बदली रसोई की तस्वीर—बरेली में फिर जले चूल्हे, अंगीठी और कोयले की भट्टी का दौर लौटा
बरेली में गैस संकट के चलते चूल्हे पर खाना बनाती एक महिला।

बिजली की एक दुकान पर हीटर खरीदने पहुंचे ग्राहक।

छतों पर उठने लगा धुआं, पुराने दिनों की वापसी

शहर के कई इलाकों में अब छतों पर चूल्हों का धुआं उठता दिखाई दे रहा है। जिन घरों में खुली छत है, वहां ईंटों के चूल्हे बनाकर खाना पकाया जा रहा है। गैस की कमी ने लोगों को दशकों पीछे धकेल दिया है।

प्रशासन का दावा बनाम हकीकत

जिलाधिकारी अविनाश सिंह का कहना है कि जनपद में 91 इंडेन, एचपी और भारत गैस एजेंसियां पर्याप्त स्टॉक के साथ संचालित हो रही हैं और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।
वहीं, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन बरेली की अध्यक्ष रंजना सोलंकी के अनुसार पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू गैस सप्लाई में कटौती शुरू कर दी है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति भी प्रभावित है। हालांकि उनका दावा है कि घरेलू गैस मांग के अनुरूप दी जा रही है और अतिरिक्त कीमत नहीं ली जा रही।

अंगीठी बाजार में उछाल, कीमतें दोगुनी

बरेली के बांस मंडी और सराय साहूकारा इलाके में अंगीठी की दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। थोक व्यापारी आफताब अंसारी बताते हैं कि पहले अंगीठी की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन अब हर ग्राहक इसी की मांग कर रहा है।

कारीगर मेहताब हुसैन के अनुसार पहले अंगीठी 500–1200 रुपये में बिकती थी। अब कीमत 2000–2500 रुपये तक पहुंच गई। लोहे का चूल्हा 3000–5000 रुपये में बिक रहा है। ऑर्डर की भरमार के चलते कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं, फिर भी ग्राहकों को इंतजार करना पड़ रहा है।

कोयला और लकड़ी भी महंगे, बढ़ी रसोई की लागत

शहमतगंज मंडी में कोयला बेचने वाले शिव कुमार बताते हैं कि कोयले के दाम 20–30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। लकड़ी की कीमतों में भी इजाफा हुआ है, जिससे चूल्हा जलाना भी महंगा पड़ रहा है।

इंडक्शन और हीटर की बढ़ी मांग, दाम भी दोगुने

बिजली उपकरण विक्रेता जफर इकबाल के अनुसार गैस संकट के चलते इंडक्शन और हीटर की मांग तेजी से बढ़ी है। इंडक्शन 2000 से 5500 रुपये, हीटर 250 से बढ़कर 500–1000 रुपये में मिल रहा है।

दिल्ली से पर्याप्त माल न आने के कारण कीमतों में और तेजी आई है। रमजान और ईद के चलते मुस्लिम परिवारों में इनकी मांग और बढ़ गई है।

छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा मार

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर चाय विक्रेताओं, फास्ट फूड दुकानदारों और ठेले वालों पर पड़ा है। छोटे सिलेंडर महंगे होने के कारण अब वे कोयले की भट्टी का सहारा ले रहे हैं।
इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमत पर पड़ा है। चाय, चाट और फास्ट फूड अब महंगे हो गए हैं।

गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग अतिरिक्त सिलेंडर भंडारण के लिए भी प्रयास कर रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो रही है।

आधुनिकता से मजबूरी तक का सफर

बरेली में गैस संकट ने यह साफ कर दिया है कि व्यवस्था में जरा सी कमी आम आदमी को सीधे प्रभावित करती है। आधुनिक रसोई से निकलकर लोग फिर पारंपरिक साधनों की ओर लौट रहे हैं, लेकिन अब यह विकल्प भी महंगा साबित हो रहा है।

SP_Singh AURGURU Editor