मेरा कुनाल लौटा दो साहब,कलेक्ट्रेट में गूंजती रही मां की चीख, जिप लाइन हादसे पर इंसाफ मांगता परिवार

जिप लाइन हादसे में बेटे कुनाल को खो चुके माता-पिता शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम से इंसाफ की गुहार लगाई। मां ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद एडवेंचर कंपनी ने कोई मदद नहीं की और समय पर इलाज न मिलने से बेटे की जान चली गई। परिवार ने दोषियों पर कार्रवाई, सही एफआईआर और 50 लाख मुआवजे की मांग की। डीएम ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

May 29, 2026 - 15:52
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मेरा कुनाल लौटा दो साहब,कलेक्ट्रेट में गूंजती रही मां की चीख, जिप लाइन हादसे पर इंसाफ मांगता परिवार
कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम से इंसाफ की गुहार लगाती कुणाल की मां।

आगरा। आगरा के कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को उस वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया, जब जिप लाइन हादसे में जान गंवाने वाले 16 वर्षीय कुनाल के माता-पिता इंसाफ की गुहार लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल के पास पहुंचे। बेटे को खोने का दर्द आंखों में लिए मां-बाप की चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा के पदाधिकारियों के साथ पहुंचे पीड़ित परिवार ने प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। डीएम को देखते ही कुनाल की मां फफक-फफक कर रो पड़ीं। बिलखते हुए उन्होंने कहा, “साहब, कम से कम जिम्मेदारों के नाम तो बता दो… मेरा बेटा लौटा दो। छह दिन हो गए, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। दोषियों को बचाया जा रहा है।”

मां ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद एडवेंचर कंपनी का कोई कर्मचारी मदद के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन मौके पर न एंबुलेंस थी और न ही फर्स्ट-एड की कोई व्यवस्था। आखिरकार परिवार खुद ऑटो से उसे अस्पताल लेकर भागा।

रोते हुए मां ने कहा, “अगर समय पर इलाज मिल जाता तो शायद मेरा कुनाल बच जाता। मुझे क्या पता था कि इतनी बड़ी लापरवाही होगी। जिस राइड से पहले बच्चे गए थे, उन्हें भी हेलमेट तक नहीं पहनाया गया था।”बेटे को याद करते हुए मां की हालत अचानक बिगड़ गई और वह बेसुध हो गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला। पूरे परिसर में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया।

कुनाल के पिता ने भी टूटे हुए शब्दों में अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “मेरे बच्चे की जान चली गई, इससे बड़ी लापरवाही क्या होगी? 16 साल की उम्र में भी वह मेरा सहारा था। अब मेरा सब कुछ खत्म हो गया। एडीए हो या ठेकेदार कंपनी, कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के छह दिन बाद भी पुलिस ने सही तरीके से एफआईआर तक दर्ज नहीं की। जल्दबाजी में जो तहरीर ली गई उसमें भी कई गलतियां हैं। अब तक कोई अधिकारी हमारे घर तक नहीं आया। 

अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में प्रशासन के सामने आवाज बुलंद की। संगठन ने परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। महासभा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।

जिलाधिकारी मनीष बंसल ने परिवार की पूरी बात गंभीरता से सुनी और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि परिवार का आरोप है कि हादसे के इतने दिन बाद भी न कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही जांच में पारदर्शिता दिखाई दे रही है। ऐसे में अब परिवार को सिर्फ एक ही उम्मीद है—इंसाफ।