गलत मोबाइल नंबरों ने बढ़ाई वाहन स्वामियों की मुसीबत, ओटीपी आधारित PUCC व्यवस्था बनी परेशानी का कारण, डिजिटल ट्रैफिक सिस्टम में फंस रहे लाखों लोग

आगरा। देश में परिवहन व्यवस्था तेजी से डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली आधारित होती जा रही है, लेकिन वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने के कारण अब हजारों वाहन स्वामी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ओटीपी आधारित प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) व्यवस्था लागू होने के बाद यह समस्या और अधिक सामने आने लगी है।

May 27, 2026 - 18:07
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गलत मोबाइल नंबरों ने बढ़ाई वाहन स्वामियों की मुसीबत, ओटीपी आधारित PUCC व्यवस्था बनी परेशानी का कारण, डिजिटल ट्रैफिक सिस्टम में फंस रहे लाखों लोग

वाहन मालिकों का आरोप है कि वाहन खरीदते समय कई ऑटोमोबाइल एजेंसियों ने वास्तविक स्वामी के मोबाइल नंबर के बजाय अपने स्वयं के मोबाइल नंबर वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड में दर्ज करा दिए। उस समय अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं थी, लेकिन अब ऑनलाइन सेवाओं और ओटीपी सत्यापन की अनिवार्यता के कारण लोग दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

ओटीपी एजेंसियों के नंबर पर जा रहा, वाहन स्वामी परेशान

वर्तमान में पीयूसीसी, ई-चालान, फिटनेस, परमिट और अन्य परिवहन सेवाओं में ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य होता जा रहा है। ऐसे में ओटीपी वाहन स्वामी के बजाय एजेंसी या किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर पहुंच रहा है। इस वजह से पीयूसीसी नहीं बन पा रहा। मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हो पा रहा। ई-चालान की सूचना वाहन स्वामी तक नहीं पहुंच रही। ऑनलाइन सेवाएं बाधित हो रही हैं। कई मामलों में वाहन मालिकों को यह तक नहीं पता कि उनके वाहन रिकॉर्ड में कौन सा मोबाइल नंबर दर्ज है।

बंद हो चुकी एजेंसियों ने और बढ़ाई दिक्कत

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब संबंधित ऑटोमोबाइल एजेंसी बंद हो चुकी हो या उसका मोबाइल नंबर बदल गया हो। ऐसे मामलों में वाहन स्वामी पूरी तरह असहाय हो जाते हैं और परिवहन विभाग की जटिल प्रक्रिया में फंस जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह समस्या और बड़ी हो सकती है क्योंकि देश में AI आधारित ट्रैफिक निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन तेजी से बढ़ रहा है।

AI कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन में सही नंबर बेहद जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार अब AI कैमरे, एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) सिस्टम, स्वचालित ट्रैफिक निगरानी, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन  का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में वाहन रिकॉर्ड से सही मोबाइल नंबर जुड़ा होना बेहद आवश्यक हो गया है।

यदि मोबाइल नंबर सही नहीं होगा तो ई-चालान की जानकारी वास्तविक स्वामी तक नहीं पहुंचेगी। गलत चालानों पर समय रहते आपत्ति नहीं हो सकेगी। ओटीपी आधारित सेवाएं बाधित रहेंगी। डिजिटल व्यवस्था अव्यवस्थित और अपारदर्शी बन सकती है।

परिवहन विभाग से विशेष अभियान चलाने की मांग

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और अधिवक्ता के. सी. जैन ने कहा कि यदि समय रहते मोबाइल नंबर सुधार की सरल और पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की गई तो करोड़ों वाहन स्वामी अनावश्यक परेशानियों, चालानों और प्रशासनिक जटिलताओं में फंस सकते हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन आधारित मोटर वाहन व्यवस्था में सही मोबाइल नंबर का वाहन पंजीकरण से जुड़ा होना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यदि OTP, ई-चालान और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं वास्तविक वाहन स्वामी तक नहीं पहुंचेंगी तो डिजिटल व्यवस्था जनता के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन जाएगी।

उन्होंने सरकार से मांग की कि परिवहन विभाग विशेष अभियान चलाकर वाहन रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर सुधार की सरल व्यवस्था लागू करे तथा वैकल्पिक सत्यापन प्रणाली भी उपलब्ध कराई जाए।

समय रहते नंबर अपडेट कराना जरूरी

श्री जैन ने वाहन स्वामियों को सलाह दी है कि वे अपने वाहन रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर की जांच कर जल्द से जल्द उसे अपडेट कराएं, ताकि भविष्य में पीयूसीसी, ई-चालान और अन्य डिजिटल सेवाओं में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

SP_Singh AURGURU Editor