ईरानी नौसेना के जहाज को वापस भेजने की तैयारी में भारत,  183 क्रू सदस्य भी जाएंगे वापस

भारत ईरानी नौसेना के जहाज आईआरआईएस लावन के 183 क्रू सदस्यों को उनके देश वापस भेजने की तैयारी कर रहा है। यह सभी सदस्य 4 मार्च को जहाज के कोच्चि बंदरगाह पहुंचने के बाद से यहीं रुके हुए हैं।

Mar 13, 2026 - 19:54
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ईरानी नौसेना के जहाज को वापस भेजने की तैयारी में भारत,  183 क्रू सदस्य भी जाएंगे वापस

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार कोच्चि में लंगर डाले ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन के 183 क्रू सदस्यों को वापस भेजने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इन नाविकों का कोच्चि में ठहराव अब समाप्त होने वाला है। यह युद्धपोत 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा था और तब से इसके क्रू सदस्यों को शहर में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया था।

दरअसल, आईआरआईए, लावन उस ईरानी नौसेना टुकड़ी का हिस्सा था जिसने फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन 2026 नौसैनिक अभ्यास और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लिया था। हिंद महासागर में संचालन के दौरान इस जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके बाद ईरान ने भारत से अपने तीन नौसैनिक जहाजों-आईआरआईएस लावन, आईआरआईएस बुशहर और आईआरआईएस डेना को बंदरगाह पर लाने की अनुमति मांगी थी।

यह अनुरोध ऐसे समय किया गया था जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के कारण क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। भारत ने 1 मार्च को मानवीय आधार पर इस अनुरोध को मंजूरी दे दी थी। हालांकि तीनों जहाजों में से केवल आईआरआईएस लावन ही भारत के बंदरगाह तक पहुंच पाया और 4 मार्च को कोच्चि में लंगर डाला।

दूसरा जहाज आईआरआईएस बुशहर श्रीलंका में लंगर डाले हुए है, जहां उसके क्रू सदस्यों को अस्थायी रूप से आश्रय दिया गया है। वहीं तीसरा जहाज आईआरआईएस डेना उसी दिन श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में डुबो दिया गया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ।

इस मामले पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा कि आईआरआईएस लावन को भारतीय बंदरगाह पर आने की अनुमति देना पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया फैसला था। उन्होंने कहा कि भारत को लगता है कि यह कदम उठाना बिल्कुल सही था। साथ ही उन्होंने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने इस फैसले के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत और ईरान के बीच लगातार कूटनीतिक संपर्क बना हुआ है। विदेश मंत्री जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच अब तक चार बार बातचीत हो चुकी है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थिरता बनाए रखना रहा है।

इसी क्रम में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ती शत्रुता, आम नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और साथ ही भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा को भारत की प्राथमिकता बताया।