फिर पड़ी महंगाई की मार, 10 दिन के अंदर तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढे, सीएनजी भी हुई और महंगी

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद सीएनजी के भी दाम बढ़ गए। इसका असर आने वाले दिनों में जनता की जेब पर दिखाई दे सकता है।  वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच 10 दिनों से भी कम समय में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है, वहीं डीजल 91 पैसे महंगा होकर 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया।

May 23, 2026 - 11:29
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फिर पड़ी महंगाई की मार, 10 दिन के अंदर तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढे, सीएनजी भी हुई और महंगी


 

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में मचे संकट के बीच देश में ईंधन की कीमतों में आग लगी हुई है। शनिवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद आम जनता को सीएनजी का भी बड़ा झटका लगा। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने सीएनजी की कीमतें बढ़ा दी हैं।
 
शनिवार को सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर सीएनजी के दामों में की गई यह तीसरी बढ़ोतरी है। इसके साथ ही दिल्ली में सीएनजी की कीमतें पहली बार 80 रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई हैं। इससे पहले बीते 15 मई को सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलो महंगी हुई थी।

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी महंगी होने का सबसे सीधा असर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा, जहां भारी संख्या में बसें, ऑटो और टैक्सियां इसी ईंधन पर चलती हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में ऑटो और कैब का किराया बढ़ने की पूरी संभावना है।

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की वजह से घरेलू बाजार में यह हाहाकार मचा हुआ है। मिडिल ईस्ट में तनाव से पहले जो कच्चा तेल 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल पर मिल रहा था, वह युद्ध के दौरान 120 डॉलर के पार चला गया और फिलहाल 104 से 110 डॉलर के बीच बना हुआ है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उसका अपना कच्चा तेल बास्केट जो फरवरी में महज 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह हाल के महीनों में औसतन 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा हो चुका है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा और तत्काल असर घरेलू जेब पर पड़ता है।

ईंधन के बढ़ते दामों और स्थिर किरायों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में कमर्शियल वाहन चालकों और टैक्सी यूनियनों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और चालक शक्ति यूनियन समेत कई बड़े परिवहन संगठनों ने सरकार से बढ़े हुए दाम तुरंत वापस लेने और टैक्सी के बेस किराये में संशोधन करने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि परिचालन लागत बढ़ने से ड्राइवरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महंगाई से परेशान लोगों को राहत देने के बजाय तेल कंपनियों के फायदे को प्राथमिकता दे रही है। पार्टी ने कहा, 'मोदी को सिर्फ तेल कंपनियों के मुनाफे की चिंता है। दुनिया भर की सरकारें अपने नागरिकों को राहत दे रही हैं, जबकि मोदी सरकार अपने ही लोगों को लूटने में लगी है। कम से कम एक बार जनता के हित के बारे में सोचिए, आखिर कब तक पूंजीपतियों का पक्ष लेते रहेंगे?'