ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने देने से किया इनकार,  भारत के सामने रणनीतिक चुनौती, विकल्प पर मंथन तेज

ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय तेल टैंकरों को गुजरने देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही भारत के सामने रणनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि इसी रूट से भारत को आयात होने वाले अधिकांश कच्चे तेल की सप्लाई होती है।

Mar 12, 2026 - 18:16
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ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने देने से किया इनकार,  भारत के सामने रणनीतिक चुनौती, विकल्प पर मंथन तेज


नई दिल्ली। इजरायल-अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग रूट स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चेतावनी जारी की है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी संकरे समुद्री मार्ग से होती है। लेकिन जहाजों पर हमले और सुरक्षा चेतावनियों के कारण यहां पर यातायात में भारी कमी आई है।

न्यूज एजेंसी राइटर्स के सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने गुरुवार को हॉर्मुज स्ट्रेट से भारत के तेल टैंकरों को गुजरने देने से इनकार कर दिया है। भारत के लिए यह संकट एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है क्योंकि उसके कच्चे तेल और एलपीजी आयात का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में दर्जनों भारतीय जहाजों और सैकड़ों भारतीय नाविकों की मौजूदगी को देखते हुए, नई दिल्ली ने बहुआयामी राजनयिक और सुरक्षा प्रक्रिया को सक्रिय कर दिया है।

भारत के तेल टैंकरों की रोक को लेकर हालांकि अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में भारत लगातार ईरान से अपनी कूटनीतिक बातचीत जारी रख सकता है और यह मुद्दा सुलझ सकता है। हाल में ही भारत की सफल कूटनीति उस वक्त देखने को मिली जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री  अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद दो तेल टैंकरों को ईरान ने होर्मुज से निकलने की इजाजत दे दी।

भारत केवल कूटनीति पर ही भरोसा नहीं कर रहा है। वह अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संपर्क में है। इनमें रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव,  फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा शामिल थी। जिसमें प्रमुख समुद्री मार्ग के खुले होने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा हुई।

भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में ऑपरेशन संकल्प के तहत युद्धपोत तैनात किए हैं, जो कि जहाजों को सुरक्षित निकलने में मदद करेंगे। साथ ही किसी प्रकार के हमले से बचाव और जवाबी कार्रवाई भी कर सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत नौसेना सुरक्षा देने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय नौसेना नियमित गश्त के अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और फ्रिगेट रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

भारत पिछले कई सालों से मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की निर्भरता कम कर रहा है। वह वैकल्पिक स्रोत रूस, अमेरिका, ब्राजील, गयाना, नाइजीरिया जैसे देशों से तेल खरीद बढ़ा रहा है। जिसमें रूस उसका सबसे बड़ा सप्लायर है। इन देशों से तेल बिना होर्मुज से गुजरे सीधे हिंद महासागर मार्ग में आ सकता है।

स्थिति बिगड़ने पर भारत रणनीतिक तेल भंडार खोल सकता है। जो कई दिनों तक देश को ऊर्जा संकट से बचाने में मदद करेगा। इससे भारत के पास समय मिल जाएगा और अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।