अफगानिस्‍तान में आईएसआई के जिहादी नेटवर्क का खात्‍मा,  मारा गया लाली मामा,  भारत के लिए बड़ी खुशखबरी  

हाजी लाली मामा नूरजई वर्षों से आईएसआई के लिए एक बड़ा मोहरा बना हुआ था। लाली की रहस्यमयी हालात में मौत हुई है। लाली के कश्मीर नेटवर्क को देखते हुए उसका मारा जाना भारत के लिए खुशखबरी है।

Feb 27, 2026 - 18:51
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अफगानिस्‍तान में आईएसआई के जिहादी नेटवर्क का खात्‍मा,  मारा गया लाली मामा,  भारत के लिए बड़ी खुशखबरी   


 
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के बेहद खास हाजी लाली मामा नूरजई की अफगानिस्तान में मौत हो गई है। लाली ने लंबे समय तक ISI के ऑपरेटिव और जिहादी ट्रेनर के तौर पर काम किया था। लाली की मौत कथित तौर पर हार्ट अटैक से हुई है लेकिन चर्चा है कि वह किसी सीक्रेट ऑपरेशन का निशाना बना है। ISI ने उसका भारत के खिलाफ कश्मीर में हिंसा फैलाने के लिए जमकर इस्तेमाल किया था। ऐसे में भारत के लिए उसकी मौत राहत की तरह है।

एएमयूटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि लाली रहस्यमय तरीके से मारा गया है। ऑफिशियली हार्ट अटैक को उसकी मौत बताई गई है लेकिन किसी विदेशी ताकत के रोल की भी चर्चा है। इसकी वजह पाकिस्तान और अफगानिस्तान का बढ़ता तनाव है। तालिबान का इस्लामाबाद से तनाव चरम पर है तो दिल्ली से उसके रिश्ते सुधर रहे हैं। यह भी दावा है कि लाली अब पाकिस्तान की बजाय काबुल के करीब था, यही उसकी मौत की वजह बन गया।  

हाजी लाली मामा नूरजई की मौत से एक ऐसा आदमी इस क्षेत्र से हट गया है, जो अफगान और कश्मीरी मिलिटेंट नेटवर्क में गहराई से जुड़ा हुआ था। साथ ही यह अफगानिस्तान में पाकिस्तान के घटते असर और तालिबान की प्रैक्टिकल फॉरेन पॉलिसी की निशानी है। काबुल अब पाकिस्तान के चंगुल से निकलता दिख रहा है।

पाकिस्तान की आईएसआई ने वर्षों से कश्मीर और अफगानिस्तान में प्रॉक्सी वॉर बनाए रखने के लिए लाली नूरजई और उस जैसे लोगों का इस्तेमाल किया है। लाली सुसाइड ट्रेनिंग कैंप और गुरिल्ला नेटवर्क बनाने में माहिर था। उसके ये ट्रेनिंग कैंप ISI के नापाक मकसदों को पूरा करते थे। आईएसआई ने जमकर उसका इस्तेमाल किया था।

तालिबान ने 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान की दखल को कम करने की कोशिश की है। काबुल की सरकार डिप्लोमेसी, लेजिटिमेसी और इंटरनेशनल पहचान पर जोर दे रहे हैं। भारत तक काबुल ने हालिया महीनों में काफी तेजी से पहुंच बनाई है। तालिबान ने पाकिस्तान के साथ बंधने के बजाय प्रैक्टिकल सोच दिखाई है।

भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि पाकिस्तान का टेरर नेटवर्क इलाके को अस्थिर करता है। नूरजई का मामला इसे सही साबित करता है। हालांकि लाली मामा नूरजई की मौत सिर्फ एक मिलिटेंट ऑपरेटिव का खत्म होना नहीं है। जैसे-जैसे तालिबान एक नया रास्ता अपना रहा है, भारत के साथ उनका जुड़ाव दक्षिण एशिया में बड़े बदलाव को दिखाता है।