नई नस्ल की कामयाबी के लिए इल्म, अमल और अच्छी तरबियत जरूरी: मुफ्ती अहसन मियां
-आरके सिंह- बरेली। दरगाह आला हजरत पर आयोजित उर्स-ए-हामिदी के दूसरे दिन शुक्रवार को हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रजा खान (हामिद मियां) का 86वां कुल शरीफ अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इसमें देशभर से हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। इस अवसर पर मदरसा मंजर-ए-इस्लाम का 123वां दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें मुफ्ती, आलिम, हाफिज और कारी की उपाधि हासिल करने वाले 149 विद्यार्थियों की दस्तारबंदी कर उन्हें डिग्रियां प्रदान की गईं।
समारोह को संबोधित करते हुए दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) ने कहा कि नई नस्ल की कामयाबी के लिए इल्म, अमल और अच्छी तरबियत बेहद जरूरी है। उन्होंने उपाधियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अच्छे आचरण और संस्कारों को जीवन में अपनाने की सीख दी।
दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और मुफ्ती अहसन मियां की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां सौंपी गईं और पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सैयद आसिफ मियां की देखरेख में हुआ। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख उलेमा ने तकरीर की। मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य हज समिति के सदस्य मुफ्ती मन्नान रजा का आयोजकों ने इस्तकबाल किया।
दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज नमाज-ए-फज्र के बाद कुरानख्वानी से हुआ। दिनभर नात और मनकबत का सिलसिला चलता रहा। अकीदतमंदों ने धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेकर मुफ्ती हामिद रजा खान को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
शाम को शायर-ए-इस्लाम मौलाना रजा-ए-रसूल, महशर बरेलवी, फारूक मदनपुरी, हाजी गुलाम सुब्हानी और आसिम नूरी ने काव्य पाठ किया। उनकी प्रस्तुतियों के साथ उर्स का माहौल रूहानी और अदबी रंग में सराबोर रहा।