ब्रज की रज में साकार हुआ महारास, गोपी गीत सुन अश्रुधारा में डूबा कथा मंडपम, यमुना तट पर गूंजा ‘राधे-राधे’

आगरा। श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ द्वारा यमुना तट स्थित ब्रज के आदि वन अग्रवन में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस कथा मंडपम भक्ति, भाव और महारास की अलौकिक छटा से सराबोर हो उठा। 24 फुट ऊंचे विराट श्रीनाथजी, द्वादश ज्योतिर्लिंगों और दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच जब गोपी गीत के स्वर गूंजे तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं। पूरा कथा परिसर जय जय श्री राधे के उद्घोष से देर शाम तक गुंजायमान रहा।

May 23, 2026 - 19:22
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ब्रज की रज में साकार हुआ महारास, गोपी गीत सुन अश्रुधारा में डूबा कथा मंडपम, यमुना तट पर गूंजा ‘राधे-राधे’
श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ द्वारा यमुना तट स्थित ब्रज के आदि वन अग्रवन में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन गिरिराज जी की महिमा का वर्णन करते महंत योगेश पुरी।

कथा व्यास महंत योगेश पुरी ने श्रीनाथजी और गोवर्धन पर्वत महाराज की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीनाथजी बाबा भगवान का निर्गुण-निराकार स्वरूप हैं, जबकि गिरिराज जी उनका सगुण-साकार स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के हृदय से ही गिरिराज जी की उत्पत्ति हुई है और ब्रज की रज आज भी उतनी ही पवित्र है, जितनी हजारों वर्ष पूर्व थी।

ब्रज के कण-कण में विराजते हैं ठाकुरजी

महंत योगेश पुरी ने कहा कि ब्रज के 84 कोस का प्रत्येक तीर्थ ठाकुरजी के शरीर का स्वरूप है। मुखारविंद ठाकुरजी का मुख, मानसी गंगा उनके नेत्र, चंद्र सरोवर नासिका, गोविंद कुंड अधर, राधाकुंड दिव्य हृदय और वृंदावन धाम उनके घुटनों का स्वरूप माना गया है।

उन्होंने बताया कि आगरा का प्राचीन नाम अग्रवन है और यह ब्रज के प्रमुख वनों में प्रथम वन माना जाता है। जब भगवान शिव बालकृष्ण के दर्शन के लिए कैलाश से आए, तब उन्होंने सबसे पहले अग्रवन में ही आसन लगाया था। इसी कारण श्री मनःकामेश्वर मंदिर की महिमा विशेष मानी जाती है। पुष्टिमार्ग में ठाकुरजी की पहली बैठक भी आगरा में ही मानी गई है।

महारास बना आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक

रास पंचाध्यायी का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महंत योगेश पुरी ने कहा कि संसार का अंतिम लक्ष्य परमात्मा से मिलन है। जब जीवात्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है, तभी वास्तविक शांति प्राप्त होती है।

उन्होंने कहा कि महारास केवल नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। जब गोपियां श्रीकृष्ण प्रेम में स्वयं को भूल गईं, तब वे केवल प्रेम और भक्ति का स्वरूप बन गईं।

गोपी गीत सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

जब कथा व्यास ने मधुर स्वर में गोपी गीत “जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः, श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि... का गायन किया तो पूरा कथा मंडपम विरह और भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु आंखें बंद कर मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। अनेक भक्तों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली।

शंखध्वनि, मृदंग और करतल की गूंज के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वृंदावन का महारास यमुना तट पर साकार हो उठा हो।

दैनिक यजमानों ने किया व्यास पूजन

दैनिक यजमान के रूप में पूजा बंसल, अनीता गुप्ता, विनोद गुप्ता, सरोज गुप्ता, अमर गुप्ता, रोमी गुप्ता एवं सूर्य प्रताप सिंह ने श्रीमद्भागवत जी का पूजन एवं व्यास पूजन किया।

संध्या बेला में यमुना नदी की दिव्य आरती की गई। दीपों की स्वर्णिम छटा और भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद में डूबे दिखाई दिए। इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष बंसल, भाजपा मीडिया प्रभारी पश्चिम बंगाल माधवी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रविवार को सुदामा चरित्र एवं व्यास पूजन का आयोजन होगा, जबकि सोमवार को एकादशी व्रत कथा, हवन, भंडारे और पूर्णाहुति के साथ श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का विश्राम होगा।

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SP_Singh AURGURU Editor