आज से आयकर व्यवस्था में लागू हो गया बड़ा बदलाव: नया कानून लागू, टैक्स नियमों में क्या हुए हैं फेरबदल, जानिए एडवोकेट अनिल वर्मा से
आगरा। नये वित्तीय वर्ष में देश की आयकर प्रणाली में आज (1 अप्रैल 2026) से बड़े बदलाव लागू हो गये हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम करदाताओं, निवेशकों, कारोबारियों और विदेशी खर्च करने वालों पर पड़ेगा। वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता एवं नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष अनिल वर्मा की मानें तो ये बदलाव न केवल टैक्स प्रणाली को सरल बनाएंगे, बल्कि पारदर्शिता और अनुपालन को भी मजबूत करेंगे।
एडवोकेट अनिल वर्मा ने बताया कि 1961 का पुराना आयकर अधिनियम अब आयकर अधिनियम 2025 से बदला जा चुका है, जिसका उद्देश्य जटिल प्रावधानों को सरल करना और अनावश्यक नियमों को समाप्त करना है। इसी के साथ फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह अब टैक्स ईयर शब्द लागू हो गया है, जिससे करदाताओं में होने वाला भ्रम खत्म होगा।
उन्होंने बताया कि आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा में भी आंशिक बदलाव किया गया है। सैलरी वर्ग के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि बिना ऑडिट वाले मामलों (आईटीआर-3 और आईटीआर-4) के लिए समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। इससे छोटे व्यापारियों और पेशेवरों को राहत मिलेगी।
वर्मा ने बताया कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वालों के लिए अब लागत बढ़ेगी, क्योंकि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि की गई है। ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है, वहीं फ्यूचर्स पर भी यह 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है।
हाउस रेंट अलाउंस के नियमों को और सख्त करते हुए अब किराए के साथ मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही मेट्रो शहरों की सूची में विस्तार करते हुए अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है, जहां 50% तक HRA छूट मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को मिलने वाले मील कार्ड पर टैक्स छूट 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है, जबकि गिफ्ट और वाउचर पर छूट 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। बच्चों के शिक्षा और हॉस्टल भत्तों में भी कई गुना बढ़ोतरी की गई है, जिससे परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
श्री वर्मा के अनुसार कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली गाड़ियों पर टैक्स वैल्यू भी संशोधित की गई है। 1.6 लीटर तक की गाड़ियों पर 8,000 रुपये प्रतिमाह और उससे अधिक क्षमता वाली गाड़ियों पर 10,000 रुपये प्रतिमाह टैक्स लगेगा, जबकि ड्राइवर सुविधा पर 3,000 रुपये प्रतिमाह जोड़े जाएंगे।
शेयर बायबैक के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए अब इसे डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा। वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स छूट अब केवल मूल इश्यू पर खरीदे गए बॉन्ड तक सीमित कर दी गई है।
अनिल वर्मा ने बताया कि डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर अब ब्याज खर्च की कोई कटौती नहीं मिलेगी। हालांकि टीडीएस से राहत देते हुए अब एक ही घोषणा देकर कई आय स्रोतों पर टैक्स कटौती से बचा जा सकेगा।
एनआरआई संपत्ति खरीदने के मामलों में भी आसान किए गए नियम लागू हो गये हैं, जहां अब TAN की जरूरत खत्म कर पैन से ही टीडीएस काटा जा सकेगा। विदेश यात्रा पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) को घटाकर फ्लैट 2% कर दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा सस्ती होगी। विदेश में शिक्षा और इलाज पर भी टीसीएस घटाकर 2% कर दिया गया है।
रिवाइज्ड आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, जबकि मोटर दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है।
इसके साथ ही पैन नियमों में भी बदलाव करते हुए अब केवल आधार के आधार पर पैन नहीं बनेगा और अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग फॉर्म लागू किए गए हैं। साथ ही 10 लाख रुपये से अधिक नकद जमा, 5 लाख रुपये से अधिक की गाड़ी खरीद, 1 लाख रुपये से अधिक होटल या इवेंट खर्च और 20 लाख रुपे से अधिक संपत्ति खरीद जैसे मामलों में पैन अनिवार्य होने की व्यवस्था भी लागू हो गई है।
वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता अनिल वर्मा के अनुसार ये सभी बदलाव आयकर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और करदाताओं के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका व्यापक प्रभाव देश की आर्थिक व्यवस्था पर देखने को मिलेगा।