यूपी राज्यसभा चुनाव में बड़ा ट्विस्ट, बीजेपी ने खरीदा 9वां पर्चा,सपा के तीसरे प्रत्याशी पर सस्पेंस
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में भाजपा के नौवां नामांकन पत्र खरीदने से सियासी हलचल तेज हो गई है। सपा के दो उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं, जबकि तीसरे प्रत्याशी को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। एक सीट के लिए 37 वोटों की जरूरत है और इसी गणित ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सपा के 25 विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने के दावे ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी दांव-पेच तेज हो गए हैं। भाजपा की ओर से नौवां नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद मुकाबले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। वहीं, सपा के तीसरे प्रत्याशी उतारने की तैयारी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के 25 सपा विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने के दावे ने चुनावी गणित को और पेचीदा कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होकर छह अक्टूबर तक चलेगी। मतदान 16 अक्टूबर को प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है।
भाजपा ने खरीदा नौवां पर्चा, बढ़ा सस्पेंस
समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने के संकेतों के बीच भाजपा ने नौवां नामांकन पत्र खरीद लिया है। इससे यह साफ है कि पार्टी ने संभावित मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, नौवां नामांकन पत्र किस उम्मीदवार के लिए होगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। इससे पहले भाजपा की ओर से आठ नामांकन पत्र खरीदे जाने की जानकारी सामने आई थी। अब नौवां पर्चा खरीदे जाने से राज्यसभा चुनाव में दसवीं सीट को लेकर मुकाबले की संभावना और मजबूत हुई है।
सपा के तीसरे उम्मीदवार पर टिकी निगाहें
सपा ने राज्यसभा के लिए प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है। अब सियासी निगाहें सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार पर टिकी हैं। सपा नेताओं की ओर से तीसरे प्रत्याशी के संकेत दिए गए हैं और पार्टी ने इस चुनाव में और चौंकाने वाले कदम उठाने की बात भी कही है। मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से सपा के दो उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। यही वह बिंदु है जहां से भाजपा और सपा के बीच विधायकों को अपने पक्ष में रखने की कवायद महत्वपूर्ण हो जाती है।
37 वोटों का गणित तय करेगा राज्यसभा का रास्ता
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोटों की जरूरत होगी। यही संख्या पूरे चुनावी गणित का केंद्र बन गई है। भाजपा के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या होने के कारण वह कई सीटों पर मजबूत स्थिति में है। दूसरी ओर, सपा अपने दो प्रत्याशियों के बाद तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषणों में भी दसवीं सीट को मुख्य मुकाबले का केंद्र बताया जा रहा है।
केशव मौर्य के दावे ने बढ़ाया सस्पेंस
इस बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। मौर्य ने दावा किया कि सपा के 25 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भाजपा की ओर से ऐसा कदम उठाया जा सकता है, जिससे विपक्ष को आश्चर्य होगा। यह दावा भाजपा की ओर से किया गया राजनीतिक बयान है; संबंधित विधायकों की पहचान या उनके पाला बदलने की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। मौर्य का यह बयान सपा के तीसरे प्रत्याशी उतारने की संभावित रणनीति के बीच आया है। ऐसे में दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे के खेमे में समर्थन जुटाने की कोशिशों को लेकर अटकलें तेज हैं।
विधायकों पर बढ़ी निगरानी, दलों ने कसी कमर
राज्यसभा चुनाव में मुकाबला नजदीक आते ही राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गए हैं। संख्या बल के बावजूद अतिरिक्त सीट पर मुकाबला होने की स्थिति में क्रॉस वोटिंग, समर्थन जुटाने और अंतिम समय के राजनीतिक समीकरण अहम हो सकते हैं। सपा की ओर से भी उन विधायकों को साथ लाने की कोशिश के संकेत हैं, जिन्हें पार्टी के भीतर असंतोष या आगामी चुनाव में टिकट कटने की आशंका से जोड़ा जा रहा है। वहीं भाजपा की ओर से भी विपक्षी खेमे के विधायकों से संपर्क के दावे किए जा रहे हैं।
2027 से पहले शक्ति परीक्षण
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह राज्यसभा चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में विधायकों की संख्या के साथ-साथ पार्टी के भीतर एकजुटता और सहयोगी दलों के समर्थन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल भाजपा ने नौवां नामांकन पत्र खरीदकर मुकाबले की तस्वीर में नया मोड़ जरूर ला दिया है, लेकिन अंतिम स्थिति छह अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच होगी और 16 अक्टूबर को मतदान होगा।