आई-पैक पर छापे मे ममता का दखल,  सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी,  बोला- यह अच्छी स्थिति नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक दफ्तर पर ईडी की छापेमारी में मुख्यमंत्री बनर्जी के हस्तक्षेप को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह 'अच्छी स्थिति नहीं' है। अदालत ने कहा कि किसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा आने पर उसे बिना उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता।

Mar 18, 2026 - 20:52
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आई-पैक पर छापे मे ममता का दखल,  सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी,  बोला- यह अच्छी स्थिति नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से ईडी की कार्रवाई में दखल देना 'अच्छी स्थिति नहीं' है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में बाधा डाली जाती है तो उसे बिना उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता।

बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस पंकज मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि ईडी जैसी सेंट्रल बॉडी को तब बिना उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता जब उसके काम में रुकावट आती है। यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब ईडी ने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के दफ्तर पर छापा मारा था।

पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि ईडी कोई स्वतंत्र कानूनी इकाई नहीं है, बल्कि यह सिर्फ सरकार का एक विभाग है। इसलिए वह सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती। उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्रीय एजेंसियों को अनुच्छेद 32 के तहत अदालत जाने की अनुमति मिलती है, तो यह संघीय ढांचे के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि ईडी किसी अन्य एजेंसी से जांच की मांग नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जब तक कोई प्राथमिक अपराध दर्ज नहीं होता, तब तक ईडी मामले में दखल नहीं दे सकती।

यह विवाद जनवरी में उस समय शुरू हुआ था जब ईडी ने आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा। उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गई थीं, जिसके बाद इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच टकराव बढ़ रहा है, और क्या इससे संघीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है?