मायावती ने भतीजे ईशान को दी बड़ी जिम्मेदारी, आकाश के बाद बने बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर
बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान छोटे भतीजे ईशान आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाने का ऐलान किया। यह पद पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद के पास था, जिन्हें 9 सितंबर को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। करीब 20 दिन में हुई दूसरी बड़ी बैठक में 400 से अधिक पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में ईशान के लिए पहली पंक्ति में प्रमुख नेताओं के साथ सीट लगाए जाने और मायावती द्वारा उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व के नए समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में नेतृत्व और संगठन को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाने का ऐलान किया है। बसपा में यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे पहले मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। मायावती ने 9 सितंबर को आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया था। इसके बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में अहम भूमिका दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मायावती ने इसके लिए लखनऊ स्थित बसपा कार्यालय में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। खास बात यह रही कि करीब 20 दिन के भीतर यह पार्टी की दूसरी बड़ी बैठक थी। बुधवार को मायावती सुबह ठीक 11 बजे पार्टी कार्यालय पहुंचीं। उनके साथ उनके छोटे भाई आनंद कुमार और छोटे भतीजे ईशान आनंद भी मौजूद थे।
मायावती के पहुंचते ही ईशान का बदला अंदाज
बैठक स्थल पर मायावती के पहुंचते ही ईशान आनंद उनके पीछे-पीछे दिखाई दिए। मायावती सीधे अपनी चेयर तक पहुंचीं, जबकि ईशान आनंद कुछ देर तक उनके सामने हाथ बांधकर खड़े रहे। इसके बाद मायावती ने ईशान की पीठ पर हाथ रखा। इस दौरान ईशान ने झुककर मायावती के पैर छुए। बैठक के दौरान पार्टी कार्यालय में बैठने की व्यवस्था में भी बदलाव नजर आया। पहले मायावती के आसपास सीमित संख्या में कुर्सियां लगाई जाती थीं, लेकिन इस बार सामने की लाइन में प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, उपाध्यक्ष आनंद कुमार के साथ ईशान आनंद के लिए भी कुर्सी लगाई गई थी। इसे संगठन में ईशान की नई भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
400 से ज्यादा पदाधिकारी बैठक में पहुंचे
बसपा की इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देशभर से पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। करीब 400 पदाधिकारियों के बैठक में हिस्सा लेने की बात सामने आई है। विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी बैठक में पहुंचे। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जिला अध्यक्षों तथा मंडल कोऑर्डिनेटरों की भी मौजूदगी रही। बैठक में दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस यूकेश सिंह भी पहुंचे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों की मौजूदगी में मायावती ने संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
आकाश के बाद ईशान को जिम्मेदारी, बसपा में नए समीकरण के संकेत
ईशान आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व के अगले समीकरण को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आकाश आनंद को पहले मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था और उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि बाद में उनके साथ पार्टी नेतृत्व के फैसलों में कई बदलाव हुए और अंततः सितंबर में उन्हें बसपा से अलग कर दिया गया। अब ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मायावती परिवार की नई पीढ़ी में एक और चेहरे को पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका के लिए तैयार कर रही हैं। हालांकि ईशान की नई भूमिका को लेकर उनके अधिकारों और भविष्य की राजनीतिक जिम्मेदारियों की पूरी तस्वीर आगे होने वाली संगठनात्मक गतिविधियों से और स्पष्ट होगी।
20 दिन में दूसरी बड़ी बैठक, संगठन पर मायावती का फोकस
लगातार दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक बुलाए जाने से यह भी स्पष्ट है कि बसपा नेतृत्व इस समय संगठनात्मक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दे रहा है। राज्यों से लेकर जिला और मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों की मौजूदगी के जरिए पार्टी के जमीनी संगठन की स्थिति और आगामी रणनीति पर चर्चा का मंच तैयार किया गया। आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद ईशान आनंद को अहम जिम्मेदारी मिलना ऐसे समय हुआ है, जब बसपा को अपने संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लेने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक पार्टी की आगे की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल ईशान आनंद की नई जिम्मेदारी के बाद बसपा में मायावती के बाद संगठन के प्रमुख चेहरों की भूमिका और परिवार की नई पीढ़ी के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में ईशान को कितनी व्यापक जिम्मेदारियां मिलती हैं और वह संगठन में किस तरह सक्रिय होते हैं, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।